सीमावर्ती जिले के एक साहब इन दिनों भगवान से कम और हिसाब-किताब से ज्यादा परेशान हैं। किसी बड़े नेता के परिजनों की धार्मिक यात्रा का इंतजाम क्या कराया, अब उसका बोझ उनके सिर पर आ गया है।
कहते हैं, तीर्थ का पुण्य तो यात्रियों को मिला, लेकिन पाप का हिसाब साहब की फाइल में दर्ज हो गया।


















