दमोह, 20 जून। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हिण्डोरिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम आनु में एक बेहद दर्दनाक और हृदयविदारक वाकया प्रकाश में आया है। यहाँ एक ही परिवार के चार मासूम बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें शनिवार को आनन-फानन में जिला अस्पताल दमोह लाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत एक पांच वर्षीय बालक को मृत घोषित कर दिया। वहीं, अन्य तीन बच्चों की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है और वे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
प्राप्त विवरण के अनुसार, मृतक धर्मेंद्र (5 वर्ष), पुत्र माखन प्रजापति, निवासी ग्राम आनु, शुक्रवार की रात अपने सगे भाई-बहनों रीना (3 वर्ष), दिनेश (7 वर्ष) और दीपक (9 वर्ष) के साथ घर के एक कमरे में सोया हुआ था। परिजनों ने बताया कि जिस कमरे में चारों मासूम सो रहे थे, उसी बंद कमरे में कीटनाशक दवा (सल्फास या अन्य प्रिजर्वेटिव) डालकर उपचारित किया गया गेहूं भी भारी मात्रा में रखा हुआ था। शनिवार की सुबह जब बच्चों की हालत अचानक बिगड़ने लगी और वे बेसुध होने लगे, तो परिजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर भागे। अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने गहन परीक्षण के बाद धर्मेंद्र को मृत घोषित कर दिया, जबकि शेष तीनों भाई-बहन गंभीर अवस्था में उपचाराधीन हैं।

जिला चिकित्सालय में आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मधुर चौधरी, डॉ. ललिता, डॉ. राजेश नामदेव और डॉ. सुनील जैन सहित पूरी मेडिकल टीम बच्चों की जान बचाने में मुस्तैदी से जुटी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, तीनों मासूमों की स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही है। पीड़ित परिवार का मानना है कि बंद कमरे में रखे गेहूं में डाली गई रासायनिक दवा की अत्यधिक तेज और जहरीली दुर्गंध के फेफड़ों में समाने के कारण बच्चों की काया विषाक्त हो गई। बहरहाल, मासूम की मौत और अन्य बच्चों के बीमार होने के पुख्ता व वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा विसरा जांच के बाद ही संभव हो सकेगी।
इस दुखद घटना की भनक लगते ही हिण्डोरिया थाना पुलिस की टीम अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंची और मर्ग कायम कर मामले की वैधानिक जांच शुरू कर दी है। दमोह पुलिस का कहना है कि लापरवाही सहित तमाम संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की बारीकी से तफ्तीश की जा रही है।

कृषि और चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना ग्रामीण अंचलों के लिए एक बड़ा और कड़ा सबक है। घरेलू स्तर पर अनाज को घुन और कीड़ों से सुरक्षित रखने के लिए उपयोग की जाने वाली रासायनिक कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल हमेशा बेहद सावधानी और तय मानकों के तहत ही किया जाना चाहिए। दवा युक्त अनाज को इंसानों के रहने, उठने-बैठने या सोने वाले कमरों में बंद करके रखना जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि इनसे निकलने वाली गैसें (जैसे फॉस्फीन) बेहद जहरीली होती हैं, जिनका असर बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे तेज होता है। जिला प्रशासन और कृषि वैज्ञानिकों ने नागरिकों से पुरजोर अपील की है कि कीटनाशकों का प्रयोग करते समय सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें और ऐसे अनाज को हमेशा हवादार, अलग और बच्चों की पहुंच से दूर सुरक्षित गोदामों में ही रखें।


















