सीनियरिटी की लंबी सीढ़ी चढ़ चुके एक साहब अब भी पोस्टिंग के प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। आखिरकार वे अपने शुभचिंतक माननीय के दरबार पहुंचे और फरियाद कम, चेतावनी ज्यादा दी- "जो जोर लगाना है अभी लगा लो। यह आखिरी मौका है। मेरे जैसा खिलाड़ी फिर मैदान में नहीं मिलेगा।"
अब माननीय भी सोच में हैं कि इतनी आत्मविश्वास भरी अपील आखिर किस आधार पर है।


















