बालोद, 20 जून।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित पाटेश्वर धाम को कथित अवैध कब्जे से आजाद कराने की जिद पर अड़ा आदिवासी समाज आज एक बहुत बड़ा प्रदर्शन करने जा रहा है। इस महाआंदोलन की संवेदनशीलता को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियातन पूरे जिले की सरहदों को पूरी तरह सील कर दिया है।
विभिन्न आदिवासी संगठनों का सीधा आरोप है कि डौंडीलोहारा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले तुएगोंदी-जामड़ी इलाके की आरक्षित वन भूमि पर ग्राम सभा की वैध मंजूरी के बिना ही बड़े पैमाने पर धार्मिक निर्माण कार्य धड़ल्ले से किए जा रहे हैं।
सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों के अनुसार, एक स्वयंभू बाबा द्वारा लगभग 12 एकड़ की वन भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है। इस कृत्य के चलते मूल निवासियों के पारंपरिक और सदियों पुराने देवस्थल पूरी तरह नष्ट हो रहे हैं, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले बीते 1 जून को भी 10 हजार से अधिक आदिवासियों ने कलेक्टरेट कार्यालय का उग्र घेराव किया था। उस दौरान उत्पन्न हुए हिंसक हालातों को संभालने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। तब प्रशासन ने उचित कार्रवाई के लिए 20 जून तक की मोहलत मांगी थी।
दी गई समय-सीमा समाप्त होने पर आज पुन: आंदोलन और कड़े एक्शन की चेतावनी दी गई थी। कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में तीन हजार से ज्यादा पुलिस बल तैनात किया गया है। जामड़ीपाट समेत 20 गांवों में विशेष चौकसी बरती जा रही है।
आदिवासी नेता तुकाराम कोर्राम ने बताया कि रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन पर अवैध कब्जे के अलावा अवैध खनन भी किया जा रहा है। आदिवासियों के पवित्र देवस्थलों का अस्तित्व धीरे-धीरे मिटाया जा रहा है, जिसे बचाने के लिए समाज आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर हो गया है।

















