नई दिल्ली, 24 जून।
देश के सर्विस सेक्टर की गतिविधियों और वृद्धि दर की नियमित निगरानी के लिए केंद्र सरकार जुलाई 2026 से एक नया मासिक सूचकांक शुरू करने जा रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने बताया कि इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (आईएसपी) के माध्यम से औपचारिक सेवा क्षेत्र में होने वाले अल्पकालिक बदलावों को मासिक आधार पर मापा जाएगा।
मंत्रालय ने इस नए सूचकांक को लेकर विस्तृत प्रश्नोत्तर पुस्तिका भी जारी की है। इसके अनुसार आईएसपी ऐसा अल्पकालिक आर्थिक संकेतक होगा, जो एक निर्धारित आधार अवधि की तुलना में सेवा क्षेत्र के उत्पादन में समय के साथ होने वाले बदलावों को दर्शाएगा। इससे विभिन्न सेवा गतिविधियों के वास्तविक उत्पादन का आकलन किया जा सकेगा।
अधिकारियों के अनुसार यह सूचकांक कार्यप्रणाली के स्तर पर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की तरह काम करेगा, लेकिन इसका फोकस औपचारिक सेवा क्षेत्र पर रहेगा। इससे सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन और गतिविधियों से संबंधित त्वरित एवं नियमित आंकड़े उपलब्ध होंगे।
मंत्रालय ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। वर्ष 2013-14 से यह देश के सकल मूल्य वर्धन में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान दे रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र की प्रगति को मापने के लिए एक समर्पित मासिक संकेतक की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
आईएसपी के माध्यम से नीति निर्माताओं और योजनाकारों को समय पर आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत निर्णय लेना आसान होगा। यह सूचकांक सेवा क्षेत्र की विकास गति को समझने और उसके रुझानों का विश्लेषण करने में भी सहायक साबित होगा।
मंत्रालय के अनुसार आईएसपी, आईआईपी के साथ एक पूरक आर्थिक संकेतक के रूप में काम करेगा और अर्थव्यवस्था की अल्पकालिक गतिविधियों का व्यापक चित्र प्रस्तुत करेगा। इससे सांख्यिकीय ढांचे को मजबूती मिलने के साथ आर्थिक विश्लेषण की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
यह नया सूचकांक हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे आर्थिक पूर्वानुमान, व्यापार चक्र के अध्ययन और सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे तथ्यों पर आधारित नीति निर्माण को भी मजबूती मिलेगी।














