पटना, 24 जून।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि आपातकाल की घटना भले ही पांच दशक पुरानी हो चुकी हो, लेकिन उससे मिले सबक आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए समाज का सजग और जागरूक बने रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी चेतना हमेशा मौजूद रहनी चाहिए जो किसी भी प्रकार की तानाशाही प्रवृत्ति पर नियंत्रण रख सके।
पटना में आयोजित ‘इमरजेंसी के 50 साल : बिहार आंदोलन और आपातकाल’ विषयक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आपातकाल केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए समाज की सामूहिक शक्ति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। आने वाली पीढ़ियों को उस दौर के संघर्ष, त्याग और बलिदान की जानकारी मिलनी चाहिए ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी समझ मजबूत हो सके।
आंबेकर ने कहा कि आपातकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाया गया था, हालांकि संघ कोई राजनीतिक दल नहीं था। उनके अनुसार यह निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक कारणों से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि उस दौर में कई राजनीतिक शक्तियां संघ को अपना विरोधी मानती थीं।
उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक देशों में तानाशाही लंबे समय तक कायम रही, लेकिन भारत में लोकतांत्रिक चेतना और समाज की जागरूकता के कारण केवल 19 महीनों में आपातकाल समाप्त हो गया। बड़े नेताओं के जेल में होने के बावजूद सामान्य नागरिकों और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं ने संघर्ष जारी रखा, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना संभव हो सकी।
आंबेकर ने स्पष्ट किया कि उस समय का संघर्ष किसी सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि संविधान, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए था। उनके अनुसार यह भारतीय समाज के चरित्र और लोकतंत्र के भविष्य से जुड़ा निर्णायक दौर था।
उन्होंने भारतीय संविधान के मूल्यों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे विचार भारतीय जीवन दृष्टि में पहले से मौजूद हैं। लोकतंत्र की मजबूती केवल कानूनों पर नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना पर भी निर्भर करती है।
कार्यक्रम में उन्होंने लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए लोकजागरण, सामाजिक समरसता, परिवार व्यवस्था की मजबूती, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील जीवनशैली और कर्तव्यबोध को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है।
इस अवसर पर बिहार आंदोलन और आपातकाल विरोधी संघर्ष से जुड़े जेपी सेनानियों को सम्मानित किया गया। साथ ही बिहार आंदोलन और आपातकाल पर आधारित युगवार्ता तथा नवोत्थान पत्रिकाओं का लोकार्पण भी किया गया, जिनमें उस दौर के संघर्ष और ऐतिहासिक घटनाओं का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया है।














