भोपाल, 24 जून।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद और अति-गरीब परिवारों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के हितग्राहियों के लिए दुग्ध संग्रहण और विपणन की मजबूत व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि उन्हें उत्पादित दूध का उचित मूल्य मिल सके।
लोक भवन में आयोजित पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा बैठक में राज्यपाल ने कहा कि यह योजना केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि अति-गरीब परिवारों के पोषण और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम है। उन्होंने विशेष रूप से बैगा, भारिया और सहरिया जैसी अति-पिछड़ी जनजातियों के पात्र परिवारों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि दुग्ध परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विभागीय अथवा अन्य संस्थागत सहयोग से आवश्यक वाहनों की उपलब्धता पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर पात्र हितग्राहियों तक इसकी जानकारी पहुंचाई जाए।
उन्होंने महिला हितग्राहियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सुझाव दिया कि पशुपालन से होने वाली आय और परिवार की आर्थिक स्थिति में आए बदलाव के अनुभव अन्य लोगों तक भी पहुंचाए जाएं। योजना की उपलब्धियों का वर्षवार और चित्रात्मक रिकॉर्ड तैयार करने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में राज्यपाल ने गुजरात के जनजातीय क्षेत्रों में संचालित दुग्ध विकास मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि लाभार्थियों को यह समझाया जाए कि परिवार के बच्चों के पोषण के लिए दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने विभाग के चार अधिकारियों को गुजरात के बनासकांठा डेयरी मॉडल के अध्ययन के लिए भेजने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी उमाकांत उमराव ने बताया कि पशुपालकों को मोबाइल के माध्यम से पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए विभाग ने सरल हिंदी में गोरस मोबाइल ऐप विकसित किया है, जो बिना इंटरनेट के भी उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में उन्नत नस्ल के पशुओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ब्रीडर एसोसिएशन विकसित किए जा रहे हैं। योजना के लिए पांच वर्षों का प्रावधान, बजट वृद्धि, पशु बीमा और पशुओं की कीमत में बढ़ोतरी जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि योजना का विस्तार 12 जिलों से बढ़ाकर 24 जिलों तक करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। साथ ही क्षेत्रवार दुग्ध सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे हितग्राहियों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
बैठक में प्रदाय पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, टीकाकरण, उपचार और नियमित निगरानी की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। विभाग ने बताया कि पशु चिकित्सकों द्वारा नियमित भ्रमण कर हितग्राहियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।














