नई दिल्ली, 02 जुलाई।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत वितरित किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता में सुधार को मंजूरी दे दी है। करीब तीन दशक बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के गुणवत्ता मानकों में बदलाव किया गया है। इस निर्णय से 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को पहले की तुलना में कम टूटे दानों वाला बेहतर गुणवत्ता का चावल मिलेगा। राशन की पात्रता और मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
सरकार के फैसले के अनुसार कच्चे चावल में टूटे दानों की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं उसना चावल में यह सीमा 16 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत होगी। बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की खरीद तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएगी और इसे खरीफ विपणन सत्र 2027-28 तक सभी खरीद करने वाले राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। वितरण भी चरणबद्ध ढंग से किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि लाभार्थियों तक अधिक साबुत और बेहतर गुणवत्ता वाला चावल पहुंचाना भी है। नई व्यवस्था में राशन की मात्रा पहले की तरह ही रहेगी, लेकिन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
नई प्रणाली के तहत चावल की कुटाई के दौरान निकलने वाले टूटे चावल को अलग कर औद्योगिक और अन्य उत्पादक कार्यों में उपयोग किया जाएगा। इससे लाभार्थियों तक बेहतर गुणवत्ता वाला खाद्यान्न पहुंचेगा और उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित होगा।
सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से परिवहन, भंडारण और रखरखाव पर होने वाले खर्च में कमी आएगी। टूटे चावल की नीलामी सीधे चावल मिलों से की जाएगी। इसके अलावा जूट के बोरों की जगह एचडीपीई बैग के उपयोग से पैकेजिंग लागत भी घटेगी। इन उपायों से सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 2,161 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। साथ ही टूटे चावल की बिक्री से अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा, जिससे खाद्य सब्सिडी का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने बताया कि इस व्यवस्था का पायलट परीक्षण हरियाणा, आंध्र प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इसके आधार पर इसे बड़े स्तर पर लागू करने का निर्णय लिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत चावल की बोरियों पर क्यूआर-कोड भी लगाए जाएंगे, जिससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी आसान होगी। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और भंडारण प्रबंधन को मजबूती मिलेगी तथा कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी।

















