अंतरराष्ट्रीय संबंध
03 Jul, 2026

जापान के साथ भारत ने किए सबसे बड़े हरित ईंधन निर्यात समझौते

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत ने जापान के साथ हरित अमोनिया और हरित मेथनॉल की दीर्घकालिक आपूर्ति के बड़े निर्यात समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

नई दिल्ली, 3 जुलाई।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए जापान के साथ हरित ईंधन आपूर्ति के बड़े निर्यात समझौतों को अंतिम रूप दिया है। नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एसीएमई ग्रुप ने जापान की आईएचआई कॉर्पोरेशन के साथ हरित अमोनिया तथा मित्सुबिशी गैस केमिकल कंपनी (एमजीसी) के साथ हरित मेथनॉल की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए। ये सौदे राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत भारत से जापान को हरित ईंधन निर्यात के सबसे बड़े समझौतों में शामिल हैं।

जनवरी 2023 में 19,744 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ शुरू किए गए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन और उससे जुड़े उत्पादों के उत्पादन, उपयोग तथा निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। मिशन के तहत संचालित एसआईजीएचटी कार्यक्रम में भारतीय सौर ऊर्जा निगम की पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से उत्पादन के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसी योजना के तहत एसीएमई ग्रुप को प्रतिवर्ष 3.70 लाख टन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है, जो इन निर्यात समझौतों का आधार बनेगी।

आईएचआई कॉर्पोरेशन के साथ हुए समझौते के तहत एसीएमई ग्रुप प्रतिवर्ष 4.05 लाख टन हरित अमोनिया की आपूर्ति करेगा। इस परियोजना को जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय की सीएफडी योजना का समर्थन प्राप्त है। इस व्यवस्था के माध्यम से जापानी खरीदारों को मूल्य सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे दीर्घकालिक आयात को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके।

वहीं, एसीएमई ग्रुप ने अपने पारादीप संयंत्र से प्रतिवर्ष एक लाख टन हरित मेथनॉल की आपूर्ति के लिए मित्सुबिशी गैस केमिकल कंपनी के साथ 10 वर्षों का समझौता किया है। यह परियोजना वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों, विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसे यूरोपीय गैर-जैविक मूल के नवीकरणीय ईंधन संबंधी मानकों तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के स्वच्छ समुद्री ईंधन मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि एसीएमई-आईएचआई परियोजना को जापान की सीएफडी सहायता मिलना भारत के हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में बढ़ते वैश्विक विश्वास का संकेत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन मजबूत और भविष्य के अनुरूप इकोसिस्टम तैयार कर रहा है, जिससे वैश्विक निवेश, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और भारतीय हरित उत्पादों के लिए नए बाजार विकसित हो रहे हैं।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि इन समझौतों से जापान के साथ हरित अमोनिया और हरित मेथनॉल का बाजार संपर्क मजबूत हुआ है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। उनके अनुसार इससे हरित हाइड्रोजन क्षेत्र की व्यावसायिक परिपक्वता को बल मिलेगा, भारतीय स्वच्छ ईंधन वैश्विक बाजार में विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित होंगे और अंतरराष्ट्रीय मूल्य श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।

जापान सरकार के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय के उप-मंत्री ताकेहिको मात्सुओ ने कहा कि ये समझौते स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और जापान के सहयोग का महत्वपूर्ण परिणाम हैं। उनके अनुसार यह साझेदारी जापान के ऊर्जा परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में एसीएमई ग्रुप ने परियोजनाओं की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करने के बाद दोनों समझौतों पर औपचारिक हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, जापान सरकार के प्रतिनिधियों तथा एसीएमई ग्रुप, आईएचआई कॉर्पोरेशन और एमजीसी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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