नई दिल्ली, 03 जुलाई।
देश के प्रमुख विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने एक संयुक्त पत्र जारी कर चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है।
संयुक्त पत्र पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत इंडी गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं के हस्ताक्षर हैं। पत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से शुरू की गई एसआईआर प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई है। विपक्ष ने पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि नई श्रेणियों के आधार पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हुए।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची से डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया के दौरान अनेक वास्तविक मतदाताओं के नाम भी हटा दिए गए। विपक्षी दलों ने दावा किया कि इस संबंध में गठित 19 ट्रिब्यूनल में से एक के समक्ष आए 1,777 मामलों में 1,717 नाम गलत तरीके से हटाए गए पाए गए।
विपक्षी दलों ने यह भी आरोप लगाया कि सीबीआई, ईडी और एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने, निर्वाचित सरकारों पर दबाव बनाने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
पत्र में न्यायपालिका पर लोगों के भरोसे का उल्लेख करते हुए संस्थाओं के कथित दमन पर चिंता भी जताई गई है। विपक्ष का कहना है कि एसआईआर जैसी प्रक्रिया का सबसे अधिक असर गरीब, अशिक्षित, दलित, आदिवासी और प्रवासी मजदूरों पर पड़ता है, क्योंकि उनके लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना और प्रक्रिया पूरी करना कठिन होता है।
विपक्षी दलों ने ईवीएम को लेकर भी सवाल उठाते हुए मतपत्र प्रणाली पर फिर से विचार करने की मांग की है। साथ ही आगामी एसआईआर प्रक्रियाओं को तत्काल रोकने और उन्हें केवल उन राज्यों में लागू करने का सुझाव दिया है, जहां अगले विधानसभा चुनाव में कम से कम पांच वर्ष का समय शेष हो, ताकि घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया जा सके।

















