नई दिल्ली, 03 जुलाई।
देश की रक्षा क्षमता को और अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए करीब 52,000 करोड़ रुपये की रक्षा खरीद परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी (एओएन) दे दी है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में स्वीकृत इन प्रस्तावों का उद्देश्य थलसेना, नौसेना और वायुसेना की युद्धक क्षमता, निगरानी व्यवस्था और वायु सुरक्षा को मजबूत करना है।
स्वीकृत प्रस्तावों में भारतीय सेना के लिए 'आकाश तरंग' एंटी-ड्रोन प्रणाली, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, अत्यंत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, टैंकों के लिए सक्रिय सुरक्षा प्रणाली और जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन शामिल हैं। इन प्रणालियों से अग्रिम मोर्चों पर सैनिकों की सुरक्षा और मारक क्षमता बढ़ाने के साथ ड्रोन एवं हवाई खतरों से मुकाबला करने की तैयारी मजबूत होगी।
नई प्रणालियों में बहु-स्पेक्ट्रल सेंसर आधारित तकनीक, टैंकों को मिसाइल और रॉकेट हमलों से बचाने वाली सक्रिय सुरक्षा प्रणाली तथा उच्च गति वाले कामिकाजे ड्रोन भी शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार ये आधुनिक तकनीकें भविष्य के युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही हैं।
भारतीय नौसेना के लिए बहु-प्रभावी समुद्री माइन, नौसैनिक जहाजों से संचालित मानवरहित हवाई प्रणाली और विद्युत प्रणोदन प्रणाली के लिए भूमि आधारित परीक्षण सुविधा को भी मंजूरी मिली है। इनसे समुद्री निगरानी, सुरक्षा और नौसैनिक अभियानों की क्षमता में वृद्धि होगी।
वहीं भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग आधारित उच्च ऊंचाई स्यूडो सैटेलाइट प्रणाली सहित अन्य प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई है। यह प्रणाली लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, संचार और दूरसंवेदी कार्यों में सहायता करेगी, जिससे सीमावर्ती और रणनीतिक क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इन प्रस्तावों की मंजूरी रक्षा आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक हथियार प्रणालियों, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक, स्मार्ट मिसाइलों और उन्नत निगरानी प्रणालियों के शामिल होने से तीनों सेनाओं की तकनीकी क्षमता और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी को नई मजबूती मिलेगी।

















