राजनीति
03 Jul, 2026

अमिट अटल’ वृत्तचित्र में सामने आया अटलजी के व्यक्तित्व का बहुआयामी सफर

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और योगदान पर आधारित वृत्तचित्र ‘अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल’ का प्रदर्शन किया गया, जिसमें उनके सार्वजनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया गया।

नई दिल्ली, 3 जुलाई।

साप्ताहिक पत्र पाञ्चजन्य की ओर से भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित विशेष वृत्तचित्र ‘अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल’ का प्रदर्शन झंडेवालान स्थित विचार विनिमय न्यास सभागार में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दत्तात्रेय होसबाले और विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ राजनीतिज्ञ डॉ. मुरली मनोहर जोशी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि यह वृत्तचित्र अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि 27 वर्ष की आयु में भाऊराव देवरस की प्रेरणा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मार्गदर्शन में अटलजी को पाञ्चजन्य का पहला संपादक बनाया गया था। उन्होंने अपने लेखन, कविताओं और प्रभावशाली वक्तृत्व से देश के सार्वजनिक जीवन पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी प्रसिद्ध कविता ‘हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय’ पहली बार पाञ्चजन्य में प्रकाशित हुई थी।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर से जुड़े अटलजी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि पाञ्चजन्य के पहले संपादकीय का शीर्षक ‘जम्मू-कश्मीर से समझौता नहीं होने देंगे’ था और अटलजी जीवनभर इस विचार पर दृढ़ रहे। उनके अनुसार अटलजी पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि तप और दायित्व मानते थे। वह दैनिक समाचार पत्र को सूचना, साप्ताहिक पत्र को प्रचार और मासिक पत्रिका को विचार का माध्यम बताते थे।

डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बिताए अपने लंबे सार्वजनिक जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक उतार-चढ़ाव के दौर में भी अटलजी ने हमेशा व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि के साथ कार्य किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अटलजी ने चीन की धरती पर जाकर उसकी नीतियों का खुलकर विरोध किया था।

डॉ. जोशी ने कहा कि जब कुछ राजनीतिक दलों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध तोड़ने का दबाव बनाया, तब अटलजी ने स्पष्ट शब्दों में अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। उन्होंने यह भी बताया कि सरस्वती वंदना को लेकर विवाद के समय प्रधानमंत्री के रूप में अटलजी ने इसके समर्थन में स्पष्ट रुख अपनाया था। साथ ही विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी से जुड़े शोध और पुनर्स्थापना के प्रयासों के प्रति भी उनकी विशेष रुचि थी।

कार्यक्रम में पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर, लेखक, पत्रकार और विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजन भी मौजूद रहे। इस अवसर पर बताया गया कि ‘अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल’ वृत्तचित्र में अटल बिहारी वाजपेयी के स्वयंसेवक, प्रचारक, कवि, पत्रकार, संपादक और प्रधानमंत्री के रूप में उनके सार्वजनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को समाहित किया गया है।

|
आज का राशिफल

समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। कार्यक्षेत्र में आगे बढऩे में रुकावट का एहसास होगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। जो चल रहा है उसे सावधानीपूर्वक संभालें। शुभांक-1-3-6

आज का मौसम

भोपाल

24° / 28°

Heavy thunderstorm

ट्रेंडिंग न्यूज़