नई दिल्ली, 3 जुलाई।
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना पर आधारित माई भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म उद्योग जगत और युवाओं के बीच मजबूत सहभागिता स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने उद्योग संगठनों से सीएसआर के माध्यम से युवाओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि माई भारत एक सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य कर रहा है, जहां युवाओं को सीखने, स्वयंसेवा, नवाचार, कौशल विकास और नेतृत्व से जुड़े विभिन्न अवसर एक ही मंच पर उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने उद्योग संघों से सीएसआर पहलों के जरिए उद्यमिता, अनुभवात्मक शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया। साथ ही माई भारत स्वयंसेवकों के सहयोग से वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में सक्रिय योगदान देने की अपील भी की।
केंद्रीय मंत्री ने युवाओं में बढ़ते मादक पदार्थ सेवन पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार, उद्योग जगत और नागरिक समाज से इस चुनौती से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देकर राष्ट्र के विकास में प्रभावी योगदान सुनिश्चित किया जा सकता है।
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे ने कहा कि उद्योग संगठनों और संस्थानों को अपनी युवा केंद्रित पहलों को माई भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना चाहिए। उनके अनुसार यह मंच देश के दूरस्थ क्षेत्रों तक रहने वाले युवाओं को भी विभिन्न अवसरों से जोड़ने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि उद्योग और युवाओं के बीच मजबूत सहयोग से नवाचार, रोजगार, उद्यमिता और सामुदायिक विकास के नए अवसर तैयार होंगे।
युवा कार्यक्रम सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने कहा कि माई भारत युवाओं को सीखने, स्वयंसेवा, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों से जोड़ने वाला व्यापक डिजिटल तंत्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने उद्योग संगठनों से इंटर्नशिप, मेंटरशिप, हैकाथॉन, कोडिंग प्रतियोगिताओं और नवाचार चुनौतियों जैसे कार्यक्रमों के लिए इस मंच का अधिक उपयोग करने का आग्रह किया।
कॉर्पोरेट मामलों की सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी ने कहा कि उद्योग और युवाओं के बीच व्यवस्थित सहयोग से युवाओं को व्यावहारिक कौशल प्राप्त होंगे और उद्योगों को भविष्य की प्रतिभाओं को पहचानने तथा उन्हें विकसित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
बैठक में सीआईआई, फिक्की, एसोचैम, नैसकॉम, पीएचडीसीसीआई, इंडिया एसएमई फोरम, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन, आईपीए, आईएसपीए, एसआईए, एनएचआरडीएन, सीएआईटी, डब्ल्यूटीसी मुंबई और एआईएआई सहित कई प्रमुख उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान माई भारत प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वयंसेवा, कौशल विकास, इंटर्नशिप और युवा सहभागिता को व्यापक बनाने के लिए सहयोग के विभिन्न मॉडल पर चर्चा हुई। सम्मेलन का समापन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार और उद्योग जगत के बीच साझेदारी को और मजबूत बनाने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

















