नई दिल्ली, 6 जुलाई।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए देश की अखंडता में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मुखर्जी के संघर्ष के बिना भारत की भौगोलिक स्थिति आज बिल्कुल अलग होती।
शाह ने जोर दिया कि यदि डॉ. मुखर्जी ने उस दौर के नेतृत्व को चुनौती न दी होती, तो आज असम और पश्चिम बंगाल का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान का हिस्सा होता। उन्होंने भारत माता के प्रति श्रद्धा और संस्कृति के महत्व को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
सहकारिता मंत्रालय के स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुखर्जी के उस ऐतिहासिक संकल्प को पूर्ण किया, जिसके लिए उन्होंने अपना बलिदान दिया था।
मुखर्जी ने 'एक देश, एक निशान, एक विधान' का नारा देकर अखंड भारत की नींव मजबूत की थी। गृह मंत्री ने बताया कि सरकार उनकी 125वीं जयंती को राष्ट्रव्यापी स्तर पर मनाएगी ताकि उनके विचारों को गांव-गांव तक पहुँचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी की मान्यता थी कि भारत का शासन व्यवस्था अपनी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय मूल्यों के अनुरूप ही चलनी चाहिए। उनके इसी समर्पण के कारण आज वे करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।


















