विशाखापत्तनम, 6 जुलाई।
भारतीय नौसेना की समुद्री मारक क्षमता को और अधिक विस्तार देते हुए महेन्द्रगिरी युद्धपोत बेड़े में शामिल होने को तैयार है। 11 जुलाई को होने वाले इस समारोह से भारत की पूर्वी समुद्री सीमा की सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत हो जाएगी।
यह स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट 'मेक इन इंडिया' की शानदार उपलब्धि है। करीब 6,670 टन वजनी इस जहाज का निर्माण पूरी तरह से देश में ही किया गया है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी पुर्जों का इस्तेमाल हुआ है, जो हमारी इंजीनियरिंग दक्षता को दर्शाता है।
अत्याधुनिक युद्धपोत अपनी तरह के पिछले डिजाइनों से कहीं ज्यादा उन्नत है। इसे विशेष रूप से हिंद महासागर में निगरानी बढ़ाने और हर तरह के समुद्री खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसकी उच्च गति और विशेष तकनीक इसे बेजोड़ बनाती है।
इसमें सुपरसोनिक मिसाइलें और पनडुब्बी रोधी प्रणाली जैसे घातक हथियार मौजूद हैं। यह युद्धपोत न केवल युद्ध की स्थिति में बल्कि आपदा राहत अभियानों में भी नौसेना की मदद करेगा।
भारत अपनी आत्मनिर्भरता को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। महेन्द्रगिरी का शामिल होना इस दिशा में एक बड़ा कदम है, जो भारत के गौरवशाली समुद्री इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगा।

















