नई दिल्ली, 06 जुलाई।
दिल्ली उच्च न्यायालय में चल रहे एक मामले में सर्च इंजन गूगल ने एक हलफनामा दायर कर स्पष्ट किया है कि यूट्यूब पर कोर्ट की कार्यवाही के अनधिकृत रिकॉर्डिंग और उनके अपलोड या शेयर होने पर निरंतर नजर रखना उसके लिए संभव नहीं है। यह हलफनामा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग वाली याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है।
गूगल ने अदालत को बताया कि किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए अनधिकृत वीडियो को स्वतः ट्रैक करना तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन है। गूगल के अनुसार, "करोड़ों वीडियो प्लेटफॉर्म पर होते हैं, जिन्हें मॉनिटर करना संभव नहीं है। हम केवल उन वीडियो को हटा सकते हैं जिनके विशिष्ट यूआरएल (URL) या वेबलिंक याचिकाकर्ता द्वारा प्रदान किए जाएं।" गूगल ने यह भी तर्क दिया कि वीडियो की सामग्री कोर्ट की कार्यवाही है या नहीं, यह पहचानना उसके लिए चुनौतीपूर्ण है।
यह मामला तब सामने आया जब याचिकाकर्ता वैभव सिंह ने आरोप लगाया कि दिल्ली आबकारी घोटाला मामले से जुड़ी सुनवाई के वीडियो को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर अदालत और केंद्र सरकार पर दबाव बनाना था। याचिका में अरविंद केजरीवाल, रवीश कुमार, दिग्विजय सिंह और आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई है। फिलहाल मामला अदालत के विचाराधीन है।


















