नई दिल्ली, 08 जुलाई।
भारत और आसियान देशों के बीच आर्थिक रिश्तों में नई ऊंचाइयां देखने को मिल रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर गौर करें तो दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा 128 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया है। इस साझेदारी को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राजधानी में 6 से 10 जुलाई तक 13वीं आसियान-भारत व्यापार समझौता (एआईटीआईजीए) की संयुक्त समिति की महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जा रही हैं। भारत के कुल वैश्विक व्यापार में इन देशों की हिस्सेदारी लगभग 11 फीसदी है, जो इसे भारत का एक प्रमुख साझेदार बनाता है।
नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में चल रहे इन सत्रों का उद्देश्य आपसी सहयोग को गहरा करना और रचनात्मक संवाद को नई गति प्रदान करना है। संयुक्त समिति ने विभिन्न उप-समितियों को रणनीतिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं और उनसे व्यापार समझौते की समीक्षा से जुड़े लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया है। वार्ता प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए उप-समितियों को ठोस परिणाम हासिल करने के प्रति प्रोत्साहित किया गया है।
वर्तमान में एआईटीआईजीए की आठ में से तीन महत्वपूर्ण उप-समितियों की बैठकें समानांतर रूप से चल रही हैं, जिनमें कस्टम्स प्रक्रियाओं को सरल बनाने, मार्केट एक्सेस और रूल्स ऑफ ओरिजिन जैसे विषय शामिल हैं। 7 जुलाई को हुई मुख्य बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य विभाग के अपर सचिव नितिन कुमार यादव और मलेशियाई प्रतिनिधि मस्तुरा अहमद मुस्तफा ने की। इस सम्मेलन में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम समेत सभी आसियान सदस्य देशों के प्रतिनिधि सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं।














