नई दिल्ली, 14 जुलाई।
चालू वित्त वर्ष में भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह मजबूत वृद्धि के साथ नया रिकॉर्ड बना रहा है। 13 जुलाई 2026 तक देश का सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 16.11 प्रतिशत बढ़कर 7.74 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वित्त मंत्रालय के मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी में कॉरपोरेट कर, गैर-कॉरपोरेट कर और सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) की अहम भूमिका रही।
रिफंड समायोजित करने के बाद शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह भी 16.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6.51 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसी अवधि में करदाताओं को जारी किए गए रिफंड में 14.57 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 1.22 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
आंकड़ों के अनुसार, शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 2.40 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1.97 लाख करोड़ रुपये था। वहीं, शुद्ध गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह बढ़कर 3.85 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष 3.44 लाख करोड़ रुपये था।
सकल कॉरपोरेट कर संग्रह 3.35 लाख करोड़ रुपये और सकल गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह 4.12 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसी अवधि में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) का संग्रह बढ़कर 26,428.96 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 17,875.88 करोड़ रुपये था।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार दर्ज हो रही मजबूत बढ़ोतरी देश की अर्थव्यवस्था की बेहतर गति और मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों का संकेत है। यह आंकड़े व्यक्तिगत करदाताओं, कंपनियों, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), फर्मों और अन्य संस्थाओं द्वारा जमा किए गए प्रत्यक्ष कर पर आधारित हैं।
















