नई दिल्ली, 15 जुलाई।
केंद्र सरकार ने भारत को विश्व के बड़े जहाज निर्माण और मरम्मत केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत गुजरात में दो महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनसे समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी।
पोरबंदर के कुचड़ी में करीब 2,000 एकड़ भूमि पर एक आधुनिक ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना बंदरगाह मंत्रालय और गुजरात समुद्री बोर्ड की संयुक्त पहल 'एनएसएचआईपी-गुजरात' के जरिए पूरी होगी, जिसकी सालाना उत्पादन क्षमता 12 से 15 लाख ग्रॉस टनेज तक होगी।
दूसरी परियोजना के तहत कच्छ की खाड़ी के वाडिनार में जहाज मरम्मत सुविधा केंद्र की स्थापना होगी। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण की इस साझा पहल पर 1,570 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिसमें सरकार की ओर से 25 प्रतिशत वित्तीय सहायता भी मिलेगी।
वाडिनार की भौगोलिक स्थिति इसे मरम्मत के लिए एक आदर्श केंद्र बनाती है। यह परियोजना पूरी होने के बाद 300 मीटर तक के बड़े वाणिज्यिक जहाजों की मरम्मत देश के भीतर ही हो सकेगी, जिससे विदेशी शिपयार्ड पर हमारी निर्भरता काफी कम हो जाएगी।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि ये परियोजनाएं न केवल घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेंगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगी। सरकार का लक्ष्य निजी भागीदारी को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक समुद्री उद्योग में अग्रणी बनाना है।
















