नई दिल्ली, 15 जुलाई।
दिल्ली की जनता को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बड़ी राहत मिलने वाली है। दिल्ली कैबिनेट ने 'राइट ऑफ सिटिजन टू टाइम बाउंड डिलीवरी ऑफ सर्विस' विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत सरकारी सेवाएं अब तय समय सीमा में मिलेंगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अधिकारी ने बिना वाजिब कारण सेवा देने में देरी की, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। लापरवाह अधिकारी पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 5,000 रुपये तक का दंड वसूला जा सकेगा।
इस नई व्यवस्था में डिजिटल तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। आवेदनों की ट्रैकिंग ऑनलाइन होगी और हर चरण की जानकारी नागरिक के पास उपलब्ध रहेगी। इससे पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया न केवल पारदर्शी होगी बल्कि जवाबदेह भी बनेगी।
विधेयक की सबसे बड़ी खासियत 'ऑटोमैटिक एस्केलेशन' प्रणाली है। यदि तय समय में काम नहीं हुआ, तो अपील करने की जरूरत नहीं पड़ेगी; मामला खुद-ब-खुद उच्च अधिकारी या 'दिल्ली राइट टू सर्विस आयोग' के पास पहुंच जाएगा।
प्रत्येक विभाग में नागरिक शिकायत निवारण प्राधिकारी तैनात किए जाएंगे जो 30 दिनों के भीतर अपीलों का निपटारा करेंगे। सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है।
















