नई दिल्ली, 15 जुलाई।
केंद्र सरकार ने ओडिशा और झारखंड में 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली रेलवे की दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं के तहत दोनों राज्यों के चार जिलों में करीब 145 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड के दोहरीकरण और राजखरसावां-डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इनसे रेलवे लाइन की क्षमता बढ़ेगी, रेल संचालन अधिक कुशल और भरोसेमंद बनेगा तथा यातायात का दबाव कम होगा।
उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है, जिससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं का आवागमन और सुगम होगा।
इन परियोजनाओं से ओडिशा और झारखंड के चार जिलों के लगभग 1,526 गांवों की करीब 14 लाख आबादी को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। इसके साथ ही क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, क्षमता विस्तार से ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवज्यू मंदिर और मेघाहातुबुरु पहाड़ियों जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा, जिससे पर्यटन को भी गति मिलेगी।
सरकार ने बताया कि ये रेल मार्ग कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर और जिप्सम जैसी प्रमुख खनिज एवं औद्योगिक वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद 44 मिलियन टन प्रतिवर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी।
सरकार के अनुसार, रेल परिवहन ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल माध्यम है। इन परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, लगभग 6 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत होगी और 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो करीब एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ के समान है।
















