नई दिल्ली, 15 जुलाई।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (बीआरसीपी) फेज-3 की शुरुआत की। इस कार्यक्रम पर कुल 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें 1,000 करोड़ रुपये भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और 500 करोड़ रुपये ब्रिटेन की वेलकम ट्रस्ट संस्था की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे।
नई दिल्ली के एरोसिटी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य भारत में विश्वस्तरीय बायोमेडिकल रिसर्च को बढ़ावा देना और वैज्ञानिकों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के तहत शोधकर्ताओं को फेलोशिप, रिसर्च ग्रांट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के अवसर दिए जाएंगे, जिससे देश में मजबूत वैज्ञानिक कार्यबल तैयार किया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत की बायोइकोनॉमी वर्ष 2014 में 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 195 अरब डॉलर से अधिक हो गई है और वर्ष 2030 तक इसके 300 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि देश में वर्तमान में करीब 12 हजार बायोटेक स्टार्टअप कार्यरत हैं और भारत दुनिया के प्रमुख वैक्सीन निर्माताओं में शामिल है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में बायोटेक्नोलॉजी अगली औद्योगिक क्रांति की सबसे बड़ी ताकत बनेगी और भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
वर्ष 2008 में शुरू हुए बीआरसीपी के तहत अब तक 500 से अधिक वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान की जा चुकी है। इस कार्यक्रम से 200 से ज्यादा शोध संस्थानों को मजबूती मिली है और हजारों युवा वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण दिया गया है। सरकार का कहना है कि फेज-3 के माध्यम से नई चिकित्सा तकनीकों, बेहतर डायग्नोस्टिक्स, सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे भारत की वैश्विक वैज्ञानिक पहचान और अधिक मजबूत होगी।
















