चेन्नई, 15 जुलाई।
देश के सबसे बड़े कुडनकुलम परमाणु संयंत्र से जुड़े संवेदनशील डेटा में सेंधमारी का मामला सामने आया है। वर्ल्ड लीक्स नाम से सक्रिय दो हैकर समूहों ने संयंत्र से संबंधित जानकारियां सार्वजनिक करने का दावा किया है। इनमें संयंत्र के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर से जुड़ी सूचनाएं, बैठक और निरीक्षण रिकॉर्ड, उपकरणों की समीक्षा तथा बीमा पॉलिसी से संबंधित करीब 19 हजार महत्वपूर्ण दस्तावेजों का विवरण शामिल बताया गया है। हैकर समूह का दावा है कि यह सामग्री रिलायंस समूह से जुड़ी है, जो इस परियोजना में ठेकेदार के रूप में कार्य कर रहा है।
तमिलनाडु में स्थित कुडनकुलम परमाणु संयंत्र देश के सात परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में सबसे बड़ा माना जाता है। रिलायंस समूह ने स्वीकार किया है कि उसके डेटा में आंशिक सेंधमारी हुई है। कंपनी के अनुसार संबंधित डेटा थर्ड पार्टी डेटा सेंटर सेवा प्रदाता योट्टा के सर्वर पर होस्ट किया गया था। कंपनी ने इस घटना की जानकारी भारत सरकार को दे दी है, हालांकि चोरी हुए डेटा की प्रकृति के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।
परमाणु सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सरकारों को सलाह देने और विभिन्न देशों की तैयारियों का आकलन करने वाली संस्था न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव के वरिष्ठ निदेशक निकोलस रोथ का कहना है कि इस तरह की डेटा लीक की घटनाएं संयंत्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। उनका मानना है कि ऐसे मामलों से यह भी सवाल उठता है कि संबंधित कंपनियां साइबर खतरों से निपटने के लिए कितनी तैयार हैं।
सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों का विवरण वर्ष 2016 से 2025 के बीच का बताया गया है। कुल 8 लाख 58 हजार फाइलों में से लगभग 19 हजार दस्तावेज सबसे अधिक संवेदनशील और गोपनीय श्रेणी के बताए गए हैं। हालांकि इन फाइलों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को वर्ष 2018 में कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की यूनिट-3 और यूनिट-4 के डिजाइन तथा निर्माण का अनुबंध मिला था। दोनों इकाइयों का निर्माण कार्य जारी है और इनके वर्ष 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है। इनके चालू होने पर कुल 2000 मेगावाट बिजली उत्पादन होने का अनुमान है।
वर्ल्ड लीक्स को ऐसा हैकर समूह बताया जाता है जो कंपनियों का डेटा चुराकर फिरौती मांगता है। मांग पूरी नहीं होने पर वह जानकारी डार्क वेब पर सार्वजनिक कर देता है। इससे पहले यह समूह कई बड़ी कंपनियों को भी निशाना बना चुका है। हाल ही में एक बड़े औद्योगिक समूह से जुड़ा गोपनीय डेटा सार्वजनिक करने का दावा भी इसी समूह ने किया था, जहां फिरौती की मांग पूरी नहीं होने के बाद जानकारी लीक कर दी गई थी।
















