असम, 15 जुलाई।
वैज्ञानिकों के एक अध्ययन में सामने आया है कि केवड़ा का पौधा इंसानों के अस्तित्व से भी करोड़ों वर्ष पुराना है। शोध के अनुसार यह पौधा भारत में करीब 2.4 करोड़ वर्ष से मौजूद है। यानी केवड़ा धरती पर उस समय से मौजूद है, जब न तो इंसानों का अस्तित्व था और न ही हिमालय का निर्माण हुआ था।
असम के माकुम कोयला क्षेत्र से केवड़ा के पत्तों के जीवाश्म प्राप्त हुए हैं। इन जीवाश्मों का अध्ययन लखनऊ स्थित बिरबल साहनी पुराजीव विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने किया। जांच में पाया गया कि ये पत्ते वर्तमान समय में पाए जाने वाले केवड़ा पौधे के पत्तों से काफी समानता रखते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार करोड़ों वर्ष पहले केवड़ा जैसे पौधे दुनिया के कई हिस्सों में मौजूद थे, लेकिन समय के साथ हुए जलवायु परिवर्तन के कारण वे अनेक क्षेत्रों से विलुप्त हो गए। भारत उन चुनिंदा स्थानों में शामिल रहा, जहां यह पौधा आज भी सुरक्षित रूप से मौजूद है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज जलवायु परिवर्तन के दौर में पौधों के अस्तित्व और उनके संरक्षण की प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण साबित होगी। साथ ही इससे भारत की जैव विविधता के विकास संबंधी अध्ययन को भी नई दिशा मिलेगी। यह शोध जीयोबायोस जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
















