देहरादून, 15 जुलाई।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में अनियमितताओं के मामले को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है।
पत्रकार वार्ता के दौरान हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि बीकेटीसी कोई निजी संस्था नहीं है। उन्होंने अपने इस्तीफे की संभावनाओं पर विराम लगाते हुए कहा कि वे इस पद पर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जो भी दोषी होगा, उसे सख्त से सख्त सजा मिलेगी।
द्विवेदी ने कांग्रेस के दावों की हवा निकालते हुए कहा कि विवादित कर्मचारी की नियुक्ति 2014 में कांग्रेस शासनकाल में हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर उस कर्मचारी को उच्च वेतनमान दिया गया था। साथ ही, उन्होंने चारधाम यात्रा के दौरान स्टाफ तैनाती प्रक्रिया का भी बचाव किया।
बीकेटीसी अध्यक्ष ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पहले की सरकार ने मंदिर समिति की निधि का दुरुपयोग किया और विधानसभा क्षेत्रों के विकास कार्यों में इसका इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि समिति के फैसलों में उस वक्त कोरम का पालन तक नहीं किया गया था।
एफआईआर और क्लीन चिट के आरोपों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि मामला सामने आते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। सीसीटीवी और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखे गए हैं। अंत में, उन्होंने गोदियाल को बदरीनाथ या केदारनाथ धाम में आकर दस्तावेजों के साथ चर्चा करने की खुली चुनौती दी है।
















