बैरकपुर, 15 जुलाई।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को बैरकपुर स्थित केंद्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान केंद्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान की विभिन्न शोध परियोजनाओं का निरीक्षण किया और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई विकास कार्यों का शिलान्यास किया।
किसानों और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि जूट एक पर्यावरण अनुकूल फसल है और भविष्य में यह प्लास्टिक का बेहतरीन विकल्प साबित होगी। उन्होंने बैरकपुर केंद्र को जूट क्रांति का मुख्य केंद्र बताते हुए कहा कि सरकार उन्नत तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
उन्होंने बताया कि अनुसंधानों के दम पर जूट का उत्पादन पहले के 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर अब 25 क्विंटल तक पहुँच गया है। उन्होंने जूट बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि अब देश में ही उच्च गुणवत्ता वाले बीज तैयार करने का विशेष अभियान चलाया जाएगा।
मंत्री ने जूट मिलों को फिर से शुरू करने की राज्य सरकार की कोशिशों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ किसानों को अपनी उपज का सही बाजार मिलेगा, बल्कि बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
चौहान ने स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयासों को भी सराहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार जूट की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव से किसानों को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही इस क्षेत्र से जुड़ी सभी समस्याओं पर एक बड़े मंथन का आयोजन किया जाएगा।
















