भोपाल, 16 जुलाई।
मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्ती ने किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक सप्ताह से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर थमने से सूखे जैसे हालात उत्पन्न हो रहे हैं। प्रदेश के 35 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जिसका सबसे बुरा असर जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों पर पड़ रहा है। हालांकि, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभागों की स्थिति फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी औसत बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर यह आंकड़ा 270.3 मिमी होना चाहिए था। इस प्रकार प्रदेश में 11 प्रतिशत की कमी देखी जा रही है। पूर्वी मध्य प्रदेश में तो यह कमी 24 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। राहत की बात यह है कि 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने और बंगाल की खाड़ी में बन रहे साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण प्रदेश में फिर से तेज बारिश का सिलसिला शुरू होने के प्रबल आसार हैं।
गुरुवार के मौसम की बात करें तो इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, भिंड, दतिया, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में हल्की बारिश व तेज हवाएं चलने का अनुमान है। वहीं दूसरी ओर, ग्वालियर, भोपाल और उज्जैन सहित अन्य जिलों में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।
जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मौसम विशेषज्ञों ने राहत की उम्मीद जताई है। यदि निम्न दाब प्रणालियां सही दिशा में आगे बढ़ती हैं, तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी सक्रियता फिर से लौट आएगी। जून में भी कम वर्षा के बाद जुलाई के शुरुआती दिनों में स्थिति सुधरी थी, लेकिन पिछले सात दिनों से बारिश न होने से जल संसाधन प्रभावित हुए हैं। अब सबकी निगाहें आने वाले दिनों पर टिकी हैं कि मानसून कब अपनी लय वापस प्राप्त करता है।













