भोपाल, 16 जुलाई।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पशुपालन विभाग को अपने अधीन करने के निर्णय को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में पटवारी ने तर्क दिया कि विभागों का प्रभार बदलना एक प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या इस बदलाव से धरातल पर व्यवस्था सुधरेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री के पास पहले से मौजूद अन्य विभागों की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जनता को केवल विभाग बदलने से नहीं, बल्कि ठोस परिणामों से मतलब है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रदेश में गोवंश के सामने आ रही समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि आज गौशालाएं संसाधनों, चारे और पानी की घोर कमी से जूझ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पशुपालन की बढ़ती लागत और सरकार से मिलने वाला अपर्याप्त अनुदान किसानों और गौ-सेवकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पटवारी ने विधानसभा में दिए गए सरकारी आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में बेसहारा पशुओं के कारण 237 सड़क हादसे हुए, जिनमें 94 लोगों की जान चली गई और 133 लोग घायल हुए। इसे उन्होंने एक गंभीर प्रशासनिक विफलता करार दिया है।
पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सरकार गौशालाओं की जमीनी हकीकत को जनता के सामने लाए और इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करे। उन्होंने पशुपालकों के लिए तत्काल राहत पैकेज देने और सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हुए पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने की भी वकालत की है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार को छुट्टा मवेशियों की समस्या का हल निकालने के साथ-साथ इस पूरे तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी, क्योंकि जनता अब केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि स्पष्ट सुधारों से संतुष्ट होगी।














