मनीला, 23 जुलाई।
फिलीपींस की राजधानी मनीला में गुरुवार को आयोजित पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भाग लिया। बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, म्यांमार संकट, दक्षिण चीन सागर विवाद और पश्चिम एशिया की स्थिति समेत कई अहम विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि आज परस्पर निर्भरता और साझा हितों के साथ प्रतिस्पर्धा तथा प्रतिद्वंद्विता भी समान रूप से मौजूद है।
विदेश मंत्री ने बैठक के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि नई क्षमताओं, बदलते संबंधों और उभरती चुनौतियों के कारण वैश्विक स्तर पर संरचनात्मक परिवर्तन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति और सुरक्षा अब अर्थव्यवस्था तथा दक्षता पर अधिक प्रभाव डाल रही है और जोखिम लेने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।
उन्होंने जानकारी दी कि भारत इस वर्ष पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की दो गतिविधियों की मेजबानी करेगा। इनमें कोच्चि में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर सातवां सम्मेलन तथा लोथल में समुद्री विरासत महोत्सव आयोजित किया जाएगा।
एस. जयशंकर ने कहा कि विभिन्न संघर्षों के कारण विश्व अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है और ऊर्जा, खाद्य तथा स्वास्थ्य सुरक्षा को विशेषकर ग्लोबल साउथ के लिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सुरक्षित और निर्बाध बने रहने चाहिए। किसी भी स्थिति में नाविकों, नागरिक जहाजों और बुनियादी ढांचे पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते।
दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत 1982 के यूएनसीएलओएस के अनुरूप कानूनी रूप से बाध्यकारी और प्रभावी आचार संहिता का समर्थन करता है, जिससे सभी वैध उपयोगकर्ताओं के अधिकार प्रभावित न हों। म्यांमार के मुद्दे पर उन्होंने राजनीतिक समाधान की आवश्यकता दोहराई और कहा कि भारत आसियान के प्रयासों का समर्थन करता है।
बैठक में उन्होंने साइबर ठगी केंद्रों के खिलाफ सामूहिक और गंभीर कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। भारत ने राहत और पुनर्वास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा भारत का मानना है कि दो-राज्य समाधान ही स्थायी शांति का मार्ग है।















