रांची, 27 जुलाई।
झारखंड उच्च न्यायालय ने जेबीवीएनएल के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर पद पर पदोन्नति से जुड़े एकल पीठ के फैसले पर बड़ा स्थगन आदेश पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने बिजली वितरण निगम की अपील मंजूर करते हुए यह राहत दी है।
निगम की तरफ से एकल पीठ के 16 दिसंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें अशुकरु खड़िया और गोपाल माझी को एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर के पद पर प्रमोशन देने के साथ ही इलेक्ट्रिकल इंजीनियर जनरल कैडर रूल 1976 में संशोधन करने का निर्देश दिया गया था।
जानकारी के मुताबिक, प्रतिवादियों की नियुक्ति बिजली विभाग में वर्ष 1984 में जूनियर इंजीनियर के रूप में हुई थी और वे पदोन्नति पाकर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर तक पहुंचे थे, जिसके बाद उन्होंने अदालत में रिट याचिका दाखिल कर आगे की पदोन्नति की मांग की थी।
प्रचलित नियमों के अनुसार, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर पद पर केवल उन्हीं अधिकारियों को पदोन्नति मिलती है जिनके पास इंजीनियरिंग की बीटेक डिग्री होती है। प्रतिवादी डिप्लोमाधारक थे, जिसके कारण बिजली वितरण निगम उन्हें यह प्रोन्नति नहीं दे रहा था। इस मामले में निगम की ओर से अधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा।

















