मुजफ्फराबाद, 29 जुलाई।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जारी अशांति के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मृतकों की संख्या बढ़कर 40 पहुंचने का दावा किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद मानवाधिकार मामलों की निगरानी करने वाले एक संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
मानवाधिकार संगठन जम्मू कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, 27 जुलाई को संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी द्वारा रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर दोबारा शुरू किए गए लॉन्ग मार्च के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से पाकिस्तानी बलों ने गोलीबारी की। संगठन का दावा है कि इस कार्रवाई में 40 से अधिक नागरिकों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए।
संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टुर्क को भेजी गई अपील में पूरे मामले की स्वतंत्र निगरानी और हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।
उधर, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने कहा कि किसी नागरिक संगठन को अपराध की श्रेणी में रखना और सार्वजनिक सभाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा तथा संगठन बनाने के अधिकार से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को कानूनी सहायता और अपने परिवारों से संपर्क का अधिकार मिलना चाहिए तथा उनके निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए।
















