नई दिल्ली, 29 जुलाई।
दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा न्यायमूर्तियों को आपत्तिजनक शब्द कहने के आरोप में पकड़े गए दो कानून (लॉ) के छात्रों को जमानत प्रदान कर दी है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रवि ने दोनों आरोपियों को मुचलके पर रिहा करने का आदेश जारी किया है।
न्यायालय द्वारा दोनों अभियुक्तों को पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये के निजी बॉंड और मुचलके पर जमानत पर छोड़ने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी पाबंदी लगाई है कि वे जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे और अदालत में चलने वाली सुनवाई की हर तारीख पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। इसके अतिरिक्त न्यायाधीश ने यह भी हिदायत दी कि दोनों युवक किसी भी साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ या गवाहों पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं करेंगे। जिन छात्रों को यह राहत मिली है, उनके नाम प्रबल प्रताप सिंह और चंद्रभान हैं। प्रबल लखनऊ विश्वविद्यालय के कानून संकाय के तृतीय वर्ष का विद्यार्थी है, जबकि चंद्रभान इसी पाठ्यक्रम का द्वितीय वर्ष का छात्र है।
दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय के सुरक्षा दल द्वारा तिलक मार्ग थाने में इनके विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत में गत 10 जुलाई को न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन तथा न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष घटी एक अप्रिय घटना का पूरा ब्योरा दिया गया था। उस दिन जब सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई का क्रम आरंभ हुआ, तब पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह खुद अपनी पैरवी कर रहा है। इस पर प्रबल ने अंग्रेजी भाषा में न्यायाधीश से कहा कि महोदय, मैं आपको यह आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी के खिलाफ प्राथमिक एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दें। इस पर न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा कि क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं। इसके उत्तर में प्रबल ने कहा कि मेरी तरफ से बस इतना ही है और सब कुछ अदालत के रिकॉर्ड पर दर्ज है। इसके पश्चात उसने मुख्य न्यायाधीश के प्रति अनुचित शब्दों का इस्तेमाल करते हुए केस की फाइल हवा में जजों की तरफ उछाल दी थी। इस हंगामे के बाद सुरक्षाकर्मियों ने फौरन प्रबल को दबोच लिया था और कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया था।

















