भोपाल, 29 जुलाई।
मध्य प्रदेश में जारी किसान आंदोलन के बीच ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग और तेज हो गई है। प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेजकर राज्य के लिए निर्धारित 4.54 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन किए जाने का आग्रह किया है।
अपने पत्र में कृषि मंत्री ने उल्लेख किया कि राज्य सरकार ने 14 मई और 3 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार के समक्ष 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग उपार्जन का प्रस्ताव रखा था। इसके बावजूद प्रदेश के लिए 4.54 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय किया गया।
उन्होंने बताया कि इस बार प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग का रकबा लगभग 14.30 लाख हेक्टेयर है। प्रति हेक्टेयर 1410 किलोग्राम अनुमानित उत्पादकता के आधार पर कुल उत्पादन करीब 20.16 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना है। इसी आधार पर कुल उत्पादन के 40 प्रतिशत के बराबर 8.06 लाख मीट्रिक टन खरीदी लक्ष्य निर्धारित करने की मांग की गई है।
कृषि मंत्री के अनुसार, पिछले वर्ष प्रदेश के लिए 4.19 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन वास्तविक उपार्जन 7.72 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया था। इस बार 3.47 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है, लेकिन अब तक करीब 82 हजार किसानों से ही खरीदी हो सकी है।
उन्होंने कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ दिलाने और दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए खरीदी सीमा में वृद्धि आवश्यक है। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर तय लक्ष्य में अन्य राज्यों की बची हुई मात्रा का हिस्सा मध्य प्रदेश को देने का भी अनुरोध किया गया है।
इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्य की मांग पर जवाब देते हुए कहा था कि ग्रीष्मकालीन सीजन 2025-26 के लिए देशभर में स्वीकृत 5.23 लाख मीट्रिक टन मूंग में से 4.54 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया गया है। केंद्र ने इसे प्रदेश के लिए अब तक का सबसे बड़ा मूंग खरीदी कोटा बताया था। साथ ही कहा था कि पीएम-आशा योजना के माध्यम से किसानों को एमएसपी का लाभ दिलाने में लगातार सहयोग किया जा रहा है।
उधर, मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की मांग को लेकर करीब दो हजार किसान भोपाल पहुंच चुके हैं। पुलिस ने मंगलवार शाम मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे किसानों को काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च- एडवांस मैटेरियल एंड प्रोसेसेज रिसर्च इंस्टीट्यूट के सामने रोक दिया, जिसके बाद किसान सड़क पर ही बैठ गए।
किसान नेताओं ने घोषणा की है कि वे रातभर वहीं डटे रहेंगे और बुधवार सुबह मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगे। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। एडिशनल एसपी अनिल शर्मा ने बताया कि किसानों को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की गई है और यही अंतिम रोक बिंदु तय किया गया है।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 19 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। सोमवार को बरखेड़ा से शुरू हुई किसान क्रांति पैदल यात्रा मंगलवार को औबेदुल्लागंज, मंडीदीप और 11 मील होते हुए भोपाल पहुंची। रास्ते में कई स्थानों पर पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसान आगे बढ़ते रहे।
भोपाल में प्रवेश के दौरान किसान तिरंगा लेकर आगे बढ़े और 'जय जवान-जय किसान' के नारे लगाते रहे। ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों का काफिला भी उनके साथ था। 11 मील बायपास पर बैरिकेडिंग को लेकर पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद किसान बैरिकेड हटाकर मुख्यमंत्री आवास की दिशा में आगे बढ़ गए।
आंदोलन में शामिल किसान लंबे समय तक डटे रहने की तैयारी के साथ पहुंचे हैं। वे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सात दिन का राशन और पानी लेकर आए हैं। कई किसान अपने साथ दाल-बाटी भी लेकर पहुंचे हैं। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार शाम अपने निवास पर अधिकारियों और कृषि मंत्री के साथ बैठक की। बैठक में किसान आंदोलन और उनकी मांगों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेकर आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में निर्देश दिए।
















