जयपुर, 29 जुलाई।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने कार्रवाई करते हुए जयपुर में अतिरिक्त जिला कलक्टर (पूर्व) कार्यालय में तैनात निजी सहायक को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। ट्रैप कार्रवाई के दौरान एडीएम (पूर्व) कार्यालय से पकड़े गए आरोपित मुकेश चौधरी से पूछताछ की जा रही है। एसीबी यह भी जांच कर रही है कि रिश्वतखोरी के मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
एसीबी के पुलिस महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि परिवादी की फर्म ने हाल ही में आयोजित फॉरेस्टर और द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के दौरान लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई थी। इसके तहत करीब 80 से 100 वाहनों के माध्यम से ओएमआर शीट और प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने तथा वापस एडीएम कार्यालय लाने का कार्य किया गया था। इस काम के करीब 16 से 17 लाख रुपये के बिलों का भुगतान लंबित था। जांच में सामने आया कि एडीएम (पूर्व) नरेंद्र कुमार वर्मा के कार्यालय में कार्यरत निजी सहायक मुकेश चौधरी ने बिल पास कराने के बदले डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में यह सौदा एक लाख रुपये पर तय हुआ। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने गोपनीय सत्यापन कराया और बुधवार दोपहर करीब दो बजे ट्रैप कार्रवाई कर आरोपित को परिवादी से एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील सिहाग ने बताया कि आरोपित ने बिल की राशि का करीब 10 प्रतिशत कमीशन मांगा था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि वह कथित तौर पर लैपटॉप खरीदने के लिए रिश्वत की रकम मांग रहा था। एसीबी अब तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह जांच कर रही है कि रिश्वत की मांग केवल निजी सहायक ने की थी या इस मामले में अन्य अधिकारी अथवा कर्मचारी भी शामिल थे।

















