नई दिल्ली, 29 जुलाई।
बहुप्रतीक्षित एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' के प्रदर्शन का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो चुका है। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की अगुवाई वाली खंडपीठ ने इस मूवी की रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज करते हुए अपना आदेश पारित कर दिया है।
यह याचिका एक मंदिर ट्रस्ट तथा एक श्रद्धालु द्वारा दायर की गई थी, जिसमें शीर्ष अदालत के गत 17 जुलाई के उस निर्णय में परिवर्तन किए जाने की गुहार लगाई गई थी, जिसके तहत न्यायालय ने पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा संपन्न होने के पश्चात सिनेमाघरों में इसके प्रदर्शन की अनुमति दी थी। सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को खारिज कर दिया कि आराध्य भगवान जगन्नाथ को कार्टून के रूप में चित्रित करना अमर्यादित है और इससे जनभावनाएं आहत होती हैं। अदालत ने दो टूक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस तरह की संवेदनशीलता की बात की जाए, तो फिर रामायण तथा महाभारत महाकाव्यों पर आधारित कोई भी कलात्मक फिल्म या रचना कभी अस्तित्व में ही नहीं आती।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी तल्ख टिप्पणी की कि रचनात्मकता और कला के विरुद्ध केवल इस आधार पर याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं कि वे लोगों की भावनाओं को प्रभावित करती हैं। कोर्ट ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि यदि इस प्रवृत्ति की याचिकाएं लगातार सामने आती रहीं, तो न्यायपालिका को बेहद कड़े निर्देश जारी करने पर विवश होना पड़ेगा।

















