जबलपुर, 01 अगस्त।
मध्यप्रदेश की न्यायिक व्यवस्था अब तकनीक के नए दौर में प्रवेश कर रही है। जबलपुर में आयोजित विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य न्यायिक अकादमी 22 अगस्त को 17 जिलों के 156 न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों को ई-साक्ष्य और ई-समन प्रणाली का प्रशिक्षण देगी। यह केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि अदालतों की कार्यप्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की शुरुआत है।
अब तक न्यायिक प्रक्रिया काफी हद तक कागजी दस्तावेजों पर निर्भर रही है। समन जारी करने में देरी, साक्ष्य प्रस्तुत करने की जटिल प्रक्रिया और फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने से न्याय मिलने में वर्षों लग जाते हैं। ई-समन से नोटिस ऑनलाइन जारी होगा और उसकी डिलीवरी का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। वहीं, ई-साक्ष्य के माध्यम से डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित ढंग से प्रस्तुत किए जा सकेंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाहों के बयान लेने से समय और खर्च, दोनों की बचत होगी।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धर्मेंद्र सिंह के निर्देश पर आयोजित यह प्रशिक्षण सुप्रीम कोर्ट की ई-कोर्ट्स परियोजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों को नई तकनीकों के उपयोग में दक्ष बनाना है, ताकि अदालतों में डिजिटल व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू हो सके।
हालांकि, इस बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। डिजिटल साक्षरता बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर इंटरनेट और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना आवश्यक होगा। इन कमियों को दूर किए बिना डिजिटल न्याय व्यवस्था पूरी तरह सफल नहीं हो सकेगी।
फिर भी यह पहल स्वागत योग्य है। न्याय में अनावश्यक देरी किसी भी लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। यदि ई-साक्ष्य और ई-समन व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो मामलों का निपटारा तेज होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिक का न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत होगा।




















