चंडीगढ़, 1 अगस्त।
हरियाणा में अपनी सेवाएं दे रहे आयुर्वेदिक चिकित्सकों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाया गया है। अब राज्य के किसी भी हिस्से में प्रैक्टिस कर रहे योग्य चिकित्सकों को 'झोलाछाप' या 'फर्जी' जैसे अपमानजनक संबोधनों से नहीं पुकारा जाएगा। यह पेशा उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के साथ-साथ देश के करोड़ों लोगों की आयुर्वेद के प्रति अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने तमाम राज्यों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि इस प्रकार की अमर्यादित शब्दावली का प्रयोग बिल्कुल बंद किया जाए।
सूबे के छोटे कस्बों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बड़ी तादाद में आयुर्वेदिक डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूसरी ओर आयुष मंत्रालय की ओर से आयुर्वेद पद्धति को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे युवाओं में इस क्षेत्र की उच्च शिक्षा हासिल करने का रुझान तेजी से बढ़ा है। देश के प्रमुख संस्थानों में अब विदेशी छात्र भी इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई करने आ रहे हैं। ऐसे में इन चिकित्सकों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने पर प्रशासन ने कड़ी नाराजगी जताई है।
भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग द्वारा जारी स्पष्ट आदेश के मुताबिक बीएएमएस, बीयूएमएस और अन्य मान्यता प्राप्त डिग्रियां हासिल करने वाले तथा राज्य परिषदों में पंजीकृत चिकित्सक पूरी तरह से वैध डॉक्टर हैं। मीडिया, सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया पर इन्हें फर्जी कहना कानूनन गलत है और ऐसा करने वालों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सभी संस्थानों और लोगों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे आयुर्वेदिक चिकित्सकों का पूरा सम्मान करें।




















