भोगापुरम, 1 अगस्त।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगापुरम में 17,900 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि उत्तर आंध्र के विकास का 'रनवे' और राज्य के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का 'लॉन्चपैड' बनेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन आंध्र प्रदेश के विकास और 'स्वर्ण आंध्र' के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनके अनुसार करीब 18 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं राज्य की सड़क, हवाई और ऊर्जा अवसंरचना को मजबूती देंगी और तेज विकास का आधार तैयार करेंगी। उन्होंने इन परियोजनाओं के लिए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम को विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक दृष्टि से भी ऐतिहासिक बताया। उन्होंने 13 हजार से अधिक आदिवासी महिलाओं और बेटियों द्वारा प्रस्तुत 'धिमसा' नृत्य की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रस्तुति भारत की सांस्कृतिक विविधता, अनुशासन और जनजातीय परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, विशेषकर आदिवासी महिलाओं और बेटियों का अभिनंदन किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भूमि महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी नेता अल्लूरी सीताराम राजू की कर्मभूमि है। उनके नाम पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापना गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यहां से यात्रा करने वाला प्रत्येक व्यक्ति उनके जीवन से जनसेवा और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा प्राप्त करेगा।
उन्होंने कहा कि पहले देश में हवाई अड्डों के नाम सीमित दायरे में रखे जाते थे, लेकिन उनकी सरकार ने इस परंपरा में बदलाव किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अयोध्या के हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि और पंजाब के हवाई अड्डे का नाम संत रविदास से जोड़ा गया। इसी क्रम में भोगापुरम के नए हवाई अड्डे का नाम अल्लूरी सीताराम राजू के नाम पर रखा गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 तक देश में 74 हवाई अड्डे संचालित थे, जो अब बढ़कर 166 हो गए हैं। उन्होंने कहा कि उड़ान योजना ने सामान्य और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भी हवाई यात्रा को सुलभ बनाया है। हाल ही में योजना के दूसरे चरण की शुरुआत की गई है, जिस पर 29 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि विमानन क्षेत्र में भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की है। काशी से शुरू हुआ स्पोक एयरपोर्ट मॉडल अब पंजाब के अमृतसर तक पहुंच गया है, जिससे अमृतसर 25 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जुड़ सकेगा। उन्होंने आंध्र प्रदेश की धरती से पंजाब के लोगों को भी इस उपलब्धि पर बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार लगातार कार्य कर रही है। विशाखापट्टनम से कृष्णापट्टनम तक पूरे तटीय क्षेत्र को कोस्टल इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। पुराने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है और मुलापेटा तथा रामायापट्टनम में नए बंदरगाह विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से जोड़ने के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाओं पर काम जारी है। राज्य के रेलवे नेटवर्क का पूर्ण विद्युतीकरण किया जा चुका है और 70 से अधिक रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत रेल, सड़क, बंदरगाह और हवाई अड्डों को एकीकृत किया जा रहा है, जिससे उद्योगों, किसानों और कारोबार को लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश भविष्य की सोच रखने वाला राज्य है और यहां के युवाओं ने सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा सिद्ध की है। अब सरकार इस क्षमता को राज्य के विकास से जोड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर जैसी भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और विशाखापट्टनम में नए संयंत्र का शिलान्यास इसी दिशा में अहम कदम है।
उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश सॉफ्टवेयर हब के साथ-साथ विनिर्माण हब के रूप में भी अपनी पहचान बनाएगा। इससे युवाओं के लिए भविष्य की तकनीकों से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी बड़े आर्थिक केंद्र के विकास के लिए केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि मजबूत औद्योगिक तंत्र की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में ऐसा ही विकास ढांचा तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से दुनिया की कई बड़ी कंपनियां राज्य में निवेश के लिए आगे आ रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अवसंरचना, डाटा सेंटर और गूगल सहित कई वैश्विक कंपनियां भी यहां निवेश की संभावनाएं देख रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य की औद्योगिक प्रगति केवल डिजिटल तकनीक तक सीमित नहीं है। सरकार विशाखापट्टनम आर्थिक क्षेत्र को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित कर रही है और इसे एशिया के अग्रणी आर्थिक क्षेत्रों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। नया हवाई अड्डा, सेमीकंडक्टर इकाइयां और अन्य औद्योगिक परियोजनाएं इसी व्यापक विकास अभियान का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का मंत्र 'इन्वेस्टमेंट से एम्प्लॉयमेंट' है। सार्वजनिक निवेश बढ़ाने के साथ निजी क्षेत्र को भी निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उनके अनुसार निवेश से विनिर्माण, विनिर्माण से निर्यात, निर्यात से रोजगार और रोजगार से लोगों की आय तथा जीवन स्तर में सुधार का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस अवसर पर राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर, गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, केंद्रीय मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, चंद्रशेखर पेम्मासानी सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।




















