कोलकाता, 05 अगस्त।
पश्चिम बंगाल प्रशासन द्वारा एक बड़े फैसले के तहत निजी ब्लड बैंक 'हेल्थ प्वाइंट' का लाइसेंस पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है। इस संस्थान पर आम नागरिकों द्वारा दान किए गए रक्त और प्लाज्मा को भारी-भरकम रकम वसूल कर खुलेआम बाहर बेचने का गंभीर इल्जाम लगा है, जिसके प्रकाश में आने के बाद सूबे के स्वास्थ्य महकमे ने यह कठोर कदम उठाया है।
आधिकारिक सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि बीते चार जनवरी के रोज बारुईपुर इलाके में इस संस्था द्वारा एक विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था, जिसमें लगभग छह सौ लोगों ने अपना रक्त दान किया था। मगर हैरानी की बात यह रही कि रक्तदान करने वाले महज दो सौ लोगों को ही कार्ड दिए गए और शेष चार सौ लोग इस सुविधा से वंचित रह गए, जिनके रक्त को बिना किसी सरकारी रिकॉर्ड में चढ़ाया अवैध रूप से बाहर करोड़ों रुपयों में बेच दिया गया और बाद में जरूरत पड़ने पर जब वे लोग अस्पताल पहुंचे तो उन्हें रक्त मिलने से इनकार कर दिया गया।
रक्त के इस अवैध काले धंधे और तस्करी का भंडाफोड़ होने के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कठोर कार्रवाई किए जाने का ऐलान किया था, जिसके फलस्वरूप सरकार ने फौरन प्रभाव से 'हेल्थ प्वाइंट' का लाइसेंस रद्द कर दिया है। जानकारों का कहना है कि बंगाल के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी निजी ब्लड बैंक का लाइसेंस इस तरह के संगीन जुर्म में छीना गया है।
जांच के दौरान यह भी चौकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इन शिविरों में आने वाले भोले-भाले लोगों को तरह-तरह के उपहारों का लालच देकर उनके शरीर से तय मानक मात्रा से कहीं अधिक यानी लगभग पांच सौ मिलीलीटर अतिरिक्त रक्त निकाल लिया जाता था। बाद में इसी बचा हुआ खून और प्लाज्मा को तस्करों के जरिए बाहर खपाया जाता था और इस शातिर तरीके से यह संस्था करोड़ों रुपयों का काला कारोबार धड़ल्ले से चला रही थी।












