देहरादून, 05 अगस्त।
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मानसून का प्रकोप लगातार चरम पर बना हुआ है और मौसम विभाग की तरफ से यह चेतावनी जारी की गई है कि आगामी सात दिनों तक सूबे के अधिकांश हिस्सों में वर्षा का यह दौर बिना थके यूं ही जारी रहेगा। हालात की नजाकत को भांपते हुए आज के दिन राज्य के तीन चुनिंदा जिलों के भीतर अतिवृष्टि और भारी से अति भारी बारिश का रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशभर में लगातार उमड़-घुमड़ रहे बादलों और मूसलाधार बरसात के मद्देनजर आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव को पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर रहने के सख्त निर्देश दे डाले हैं। इसके अतिरिक्त एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा तमाम जिलों के प्रशासनिक अमले को यह हिदायत दी गई है कि किसी भी प्रकार की आपातकालीन घड़ी में तत्काल राहत एवं बचाव कार्यों को अमलीजामा पहनाने के वास्ते पूरी चौकसी बरती जाए। मुख्यमंत्री ने आम जनमानस के साथ-साथ बाहर से आए सैलानियों से भी यह अपील की है कि वे मौजूदा मौसम के मिजाज को देखते हुए बेहद एहतियात बरतें और बिना किसी जरूरी काम के सफर पर निकलने से परहेज करें, साथ ही नदियों व नालों तथा संवेदनशील ढलानों के करीब जाने से हरसंभव दूरी बनाए रखें क्योंकि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राजधानी देहरादून समेत उत्तराखंड के तमाम इलाकों में आज दिनभर हल्की रिमझिम बारिश का सिलसिला रुक-रुक कर चलता रहा, जहां सुबह के वक्त आसमान पर काले बादलों का डेरा रहने के कारण सुहाना अहसास बना रहा। हालांकि पूर्वाह्न ग्यारह बजे के आसपास बादलों की चीरफाड़ कर थोड़ी देर के लिए धूप भी खिली, मगर चंद पलों में ही फिजाओं ने फिर से करवट बदली और आसमान बादलों से पट गया, जिससे आने वाले दिनों में भी हल्की से मध्यम वर्षा का क्रम जारी रहने की पूरी उम्मीद है।
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक आज देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में अत्यंत भारी वर्षा के आसार हैं, तो वहीं दूसरी तरफ टिहरी, पौड़ी, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में भी मूसलाधार बारिश का कड़ा अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में मेघगर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने और बेहद तीव्र बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है।
लगातार हो रही इस मूसलाधार बारिश की वजह से पहाड़ी अंचलों में भूस्खलन होने, चट्टानें खिसककर रास्तों पर आने, यातायात मार्ग तथा नेशनल हाईवे बाधित होने के साथ-साथ नदियों के उफान पर आने और निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर आशंका जताई जा रही है। ऐसे में चारधाम यात्रा या अन्य पर्वतीय क्षेत्रों की सैर पर निकलने वाले पर्यटकों को यह सलाह दी गई है कि वे केवल अत्यंत अनिवार्यता की स्थिति में ही सफर करें और हर पल अपडेट रहने वाले मौसम समाचारों पर पैनी नजर रखें।
दूसरी तरफ रुद्रप्रयाग जिले में जारी बरसात के चलते उफनती हुई अलकनंदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान यानी चेतावनी रेखा को छूकर बहने लगा है। जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह सात बजे अलकनंदा का पानी 626.00 मीटर की ऊंचाई पर रिकॉर्ड किया गया, जबकि मंदाकिनी नदी का जलस्तर 624.98 मीटर पर दर्ज हुआ जो कि अभी खतरे के निशान से थोड़ा नीचे है। स्थानीय प्रशासन द्वारा लगातार लाउडस्पीकरों के जरिए तटवर्ती बस्तियों में मुनादी करवाकर लोगों को पानी के करीब न फटकने की हिदायत दी जा रही है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इस दौर में ऊखीमठ अंचल में सबसे ज्यादा 32.50 मिलीमीटर और जखोली में 26.00 मिलीमीटर वर्षा आंकी गई, हालांकि रुद्रप्रयाग मुख्यालय का आसमान सूखा रहा। क्षेत्र में सभी मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग अभी सुचारू हैं, मगर दो राज्यमार्ग, दो लोक निर्माण विभाग के मार्ग, छह ग्रामीण सड़कें और एक अन्य रास्ता मलबे की वजह से अब भी बंद पड़ा है। प्रशासन ने संबंधित विभागों को मुस्तैद रहने का हुक्म दिया है और जनता से अपील की है कि किसी भी आपदा या रास्ते के अवरुद्ध होने की खबर तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचाई जाए।














