नई दिल्ली, 07 अगस्त।
आभा आधारित 'स्कैन एंड रजिस्टर' सेवा ने पार किया 25 करोड़ डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा, अस्पतालों में लंबी कतारों से मिल रही राहत
नई दिल्ली। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत संचालित आभा आधारित 'स्कैन एंड रजिस्टर' सेवा ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के अनुसार, इस सुविधा के माध्यम से देशभर में 25 करोड़ डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन पूरे हो चुके हैं। अक्टूबर 2022 में शुरू हुई यह सेवा मरीजों को अस्पतालों में बिना कागजी प्रक्रिया और लंबी कतार में लगे कुछ ही मिनटों में ओपीडी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध करा रही है।
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को तेजी से बढ़ावा दे रही है। आभा (Ayushman Bharat Health Account) आधारित यह प्रणाली अस्पतालों में मरीजों की पहचान, पंजीकरण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड को अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने में मदद कर रही है।
कैसे काम करती है 'स्कैन एंड रजिस्टर' सेवा?
इस सेवा के तहत मरीज अस्पताल में लगाए गए विशेष क्यूआर कोड को किसी भी ABDM-सक्षम पर्सनल हेल्थ रिकॉर्ड (PHR) ऐप से स्कैन करता है। मरीज की सहमति मिलने के बाद उसकी आभा प्रोफाइल संबंधित अस्पताल के साथ सुरक्षित रूप से साझा हो जाती है। इसके बाद बिना फॉर्म भरने या दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता के तत्काल ओपीडी रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाता है।
इस डिजिटल प्रक्रिया से अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर भीड़ कम हुई है और मरीजों का इंतजार का समय भी काफी घटा है।
देशभर में तेजी से बढ़ा विस्तार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार, यह सुविधा वर्तमान में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 756 जिलों में उपलब्ध है। देश के 30,800 स्वास्थ्य संस्थान इस प्रणाली से जुड़े हैं, जिनमें 24,323 सरकारी और 6,481 निजी अस्पताल शामिल हैं।
इन संस्थानों में एम्स, केंद्रीय और राज्य सरकार के अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, उप-जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, ईएसआईसी अस्पताल, रेलवे अस्पताल, ट्रस्ट अस्पताल और निजी अस्पताल भी शामिल हैं।
हर दिन करीब चार लाख मरीज उठा रहे लाभ
एनएचए के मुताबिक, प्रतिदिन लगभग चार लाख मरीज 'स्कैन एंड रजिस्टर' सेवा का उपयोग कर रहे हैं। यह सुविधा विशेष रूप से महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं और नियमित इलाज के लिए अस्पताल जाने वाले मरीजों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है क्योंकि इससे पंजीकरण में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन?
डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन के मामले में बिहार सबसे आगे है, जहां 7.30 करोड़ से अधिक पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 4.09 करोड़, आंध्र प्रदेश में 3.38 करोड़ और जम्मू-कश्मीर में 1.39 करोड़ डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन हुए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि देशभर में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को तेजी से अपनाया जा रहा है।
सरकारी अस्पतालों में एम्स नई दिल्ली सबसे आगे
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एम्स नई दिल्ली ने सबसे अधिक 54.29 लाख डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन दर्ज किए हैं। इसके बाद एम्स भोपाल (29.10 लाख), एम्स भुवनेश्वर (23.93 लाख), एम्स पटना (19.62 लाख) और एम्स रायपुर (18.63 लाख) का स्थान है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन क्या है?
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन भारत सरकार की प्रमुख डिजिटल स्वास्थ्य पहल है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके तहत आभा हेल्थ आईडी, डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड और अस्पतालों के बीच सुरक्षित डेटा साझा करने जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
एनएचए ने क्या कहा?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बर्नवाल ने कहा कि 25 करोड़ डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि नागरिकों और स्वास्थ्य संस्थानों का देश के डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ओपीडी पंजीकरण जैसी सामान्य प्रक्रिया को आसान बनाकर मरीजों को बेहतर अनुभव मिला है और अस्पतालों की कार्यक्षमता में भी सुधार हुआ है।
इससे लोगों को क्या फायदा होगा?
डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन से मरीजों को लंबी कतारों में इंतजार नहीं करना पड़ता, कागजी प्रक्रिया कम होती है और पंजीकरण तेजी से पूरा हो जाता है। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों में रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर होता है, जिससे इलाज की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनती है।
निष्कर्ष
'स्कैन एंड रजिस्टर' सेवा का 25 करोड़ डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा पार करना भारत के डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह पहल न केवल मरीजों की सुविधा बढ़ा रही है, बल्कि अस्पतालों में डिजिटल कार्यप्रणाली को भी मजबूत बना रही है। आने वाले समय में इस तरह की सेवाएं देश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, तेज और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
















