ढाका, 16 सितंबर।
ढाका विश्वविद्यालय के केंद्रीय छात्र संघ के नवीनीकृत संग्रहालय में पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाए जाने को लेकर छात्रों के बीच विरोध शुरू हो गया। प्रदर्शन के दौरान जिन्ना की एक तस्वीर और उनसे जुड़ी अखबारी कतरन को फाड़ दिया गया। इसके बाद बांग्लादेश छात्र फेडरेशन के कार्यकर्ताओं ने उसी स्थान पर जमात-ए-इस्लामी के पूर्व अमीर गुलाम आजम की 1981 में पिटाई की तस्वीर लगा दी।
नवीनीकरण के बाद केंद्रीय छात्र संघ ने रविवार को संग्रहालय दोबारा खोला था। प्रदर्शनी में जिन्ना से जुड़ी तीन नई सामग्री शामिल की गई थीं। इनमें 21 मार्च 1948 को ढाका के रेसकोर्स मैदान में उनके भाषण की तस्वीर, 1940 के लाहौर अधिवेशन की तस्वीर और 1970 के चुनाव से जुड़ी अखबारी कतरन शामिल थी।
1948 के भाषण में जिन्ना ने उर्दू को पाकिस्तान की एकमात्र राजभाषा बनाने की घोषणा की थी। संग्रहालय में बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की कोई अलग प्रमुख तस्वीर नहीं थी। हालांकि, उनके बेटों की 1974 की शादी से जुड़ी तस्वीर और शेख मुजीब पर प्रकाशित तीन अखबारी कतरनें प्रदर्शित थीं।
सोमवार को विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के छात्र मोहम्मद अबू तैयब ने जिन्ना की एक तस्वीर को फ्रेम से निकालकर नष्ट कर दिया। उन्होंने भाषा आंदोलन और 1971 के मुक्ति संग्राम के इतिहास का हवाला देते हुए जिन्ना की तस्वीर प्रदर्शित किए जाने पर सवाल उठाया।
बांग्लादेश छात्र फेडरेशन की विश्वविद्यालय इकाई ने जिन्ना की तस्वीर वाली जगह पर गुलाम आजम की 1981 में बैतुल मुकर्रम के बाहर पिटाई की तस्वीर लगा दी। संगठन के आयोजन सचिव अर्को बरुआ ने कहा कि केंद्रीय छात्र संघ किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है और इतिहास को एकतरफा ढंग से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
केंद्रीय छात्र संघ की संबंधित सचिव फातिमा तस्नीम जुमा ने कहा कि जिन्ना की तस्वीरें सम्मान देने के लिए नहीं, बल्कि 1905 से 1971 तक विश्वविद्यालय के इतिहास को समझाने के उद्देश्य से लगाई गई थीं। महासचिव एसएम फरहाद ने कहा कि 1948 के जिन्ना के भाषण को शामिल करने का उद्देश्य उनके बांग्लादेश-विरोधी रुख को दिखाना था, महिमामंडन करना नहीं।
बांग्लादेश जातीयतावादी छात्र दल और बांग्लादेश छात्र संघ के विभिन्न गुटों ने भी जिन्ना की तस्वीरों पर आपत्ति जताई। उन्होंने संग्रहालय में इतिहास की प्रस्तुति में मुक्ति संग्राम के प्रमुख नेताओं को उचित स्थान देने की मांग की।
विवाद के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि केंद्रीय छात्र संघ की कुछ हालिया गतिविधियां विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप नहीं थीं। प्रशासन ने बिना मंजूरी स्मारक स्थापित करने, संग्रहालय में कुछ तस्वीरें लगाने और शिक्षकों के मूल्यांकन के लिए अलग वेबसाइट शुरू करने का उल्लेख किया। कुलपति डॉ. एबीएम ओबैदुल इस्लाम ने कहा कि केंद्रीय छात्र संघ ने विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन किया है। प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
















