वॉशिंगटन, 16 सितंबर।
ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पिछले सप्ताह जर्मनी में आठ देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की बैठक की मेजबानी की। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के संभावित उपायों पर चर्चा करना था।
नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग मजबूत करने के विभिन्न तरीकों पर विचार किया गया। हालांकि, उन्होंने बैठक में शामिल देशों और चर्चा किए गए विशेष मुद्दों की जानकारी देने से इनकार किया।
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली अधिकारियों ने दावा किया कि बैठक में इजराइल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए थे। हालांकि, अमेरिकी अधिकारी ने इन देशों की भागीदारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की।
रिपोर्ट में कहा गया कि सेंट्रल कमांड के प्रमुख जनरल ब्रैड कूपर ने बैठक में मौजूद अधिकारियों से कहा कि ईरानी हमलों के बावजूद अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी कम नहीं करेगी।
कूपर ने प्रतिभागियों को होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बढ़ाने की अमेरिकी योजनाओं की जानकारी भी दी। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
बैठक ऐसे समय हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है। जून में दोनों पक्षों के बीच एक समझौते से जुड़े ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने की बात सामने आई थी, जिसमें इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को दोबारा खोलने की योजना का उल्लेख था।
इसी दौरान क्षेत्र में हूथी बलों की गतिविधियां बढ़ने की खबरें भी सामने आईं। सऊदी अरब पर हमलों में तेजी और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ने की जानकारी दी गई।
फरवरी में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया था। इस दौरान सरकारी इमारतों, सैन्य ठिकानों, मिसाइल ढांचे और वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले किए। इसके बाद संघर्ष का प्रभाव मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिला।
इस पृष्ठभूमि में जर्मनी में हुई बैठक को क्षेत्रीय सैन्य सहयोग और सुरक्षा समन्वय के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बैठक में शामिल सभी देशों और विस्तृत एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
















