कुआलालंपुर, 18 सितंबर।
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने बुधवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह म्यांमार के सैन्य शासक व राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग को आधिकारिक दौरे पर कुआलालंपुर आमंत्रित करने जा रहे हैं। इस उच्चस्तरीय यात्रा के दौरान मुख्य रूप से हजारों रोहिंग्या शरणार्थियों की उनके वतन वापसी को लेकर गंभीर चर्चा की जाएगी। अनवर ने स्पष्ट किया कि मलेशिया भले ही म्यांमार की मौजूदा सरकार को औपचारिक मान्यता प्रदान करने के पक्ष में नहीं है, परंतु शरणार्थियों के संकट जैसे संवेदनशील और व्यावहारिक मुद्दों के समाधान के लिए म्यांमार प्रशासन के साथ संवाद स्थापित करना बेहद अनिवार्य हो गया है।
प्रधानमंत्री अनवर के अनुसार, म्यांमार सरकार ने शुरुआती चरण में लगभग 5,000 शरणार्थियों को वापस लेने पर सहमति जताई है, और इन सभी विस्थापितों की स्वदेश वापसी का पूरा वित्तीय खर्च मलेशिया सरकार खुद वहन करेगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस शुरुआती सफल चरण के बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी का मार्ग भी प्रशस्त हो सकेगा। इससे पहले मलेशिया ने इस साल सितंबर माह में स्वैच्छिक वापसी कार्यक्रम के तहत करीब 1,500 शरणार्थियों को वापस भेजने की रूपरेखा बनाई थी। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) का मानना है कि म्यांमार के मौजूदा हालात को देखते हुए वहां रोहिंग्याओं की वापसी अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
ज्ञात हो कि मिन आंग ह्लाइंग ने वर्ष 2021 के तख्तापलट के बाद सत्ता पर कब्जा किया था और इस साल अप्रैल में राष्ट्रपति बनने के बाद से वे अपनी अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए लगातार विदेशी दौरों पर हैं। मलेशिया पहले म्यांमार की सैन्य हुकूमत का कड़ा आलोचक रहा है, लेकिन शरणार्थियों के स्थायी बोझ से निपटने के लिए अब कूटनीतिक बातचीत का रुख अपनाया गया है। रोहिंग्या समुदाय लंबे समय से उत्पीड़न का शिकार रहा है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने पड़ोसी देशों में शरण ली है। अकेले बांग्लादेश में दस लाख से अधिक रोहिंग्या शिविरों में जीवन बिता रहे हैं, जबकि मलेशिया में भी इनकी खासी संख्या मौजूद है। प्रधानमंत्री अनवर ने दो टूक शब्दों में कहा कि मलेशिया इन शरणार्थियों को अनिश्चितकाल तक अपने यहां नहीं बसा सकता, इसलिए कूटनीति और बातचीत के जरिए ही इस समस्या का व्यावहारिक हल निकाला जाना संभव है।
















