बीजिंग, 18 सितंबर।
अमेरिका के उस नए प्रस्ताव पर ड्रैगन का गुस्सा फूट पड़ा है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है। अमेरिकी कांग्रेस द्वारा लाए गए ‘सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ नामक इस कानून की कड़ी निंदा करते हुए चीन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस तरह के एकतरफा और मनमाने कानूनों का अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में कोई वजूद नहीं है।
चीनी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि बीजिंग अन्य देशों के साथ पारस्परिक लाभ और समानता के सिद्धांतों पर आधारित सामान्य व्यापारिक रिश्ते निभाता है। यह सहयोग किसी भी तीसरे राष्ट्र के विरुद्ध नहीं है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार का अनुचित बाहरी दबाव या हस्तक्षेप अस्वीकार्य है। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना थोपे गए ऐसे प्रतिबंध वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन हैं।
इस अमेरिकी विधेयक के तहत रूसी उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है, जबकि रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क ठोकने की बात कही गई है। हालांकि, सीनेटर केटी ब्रिट के कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, उन देशों को राहत दी जा सकती है जिनका रूस से गैस आयात कुल निर्यात का 15 प्रतिशत से भी कम है और जो अपनी इस निर्भरता को घटाने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं।
इस कड़े कानून का मुख्य मकसद यूक्रेन संघर्ष के दौरान रूस को मिलने वाले वित्तीय और आर्थिक संबल को कमजोर करना है। इसके दायरे में रूसी वित्तीय संस्थान, बैंक, ऊर्जा सेक्टर से जुड़ी कंपनियां और मॉस्को के सैन्य अभियानों में मददगार साबित होने वाली विदेशी संस्थाएं आ रही हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन के अंतराल पर इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर सूची में अन्य देशों के नाम भी जोड़े जा सकेंगे।
















