काठमांडू, 22 सितंबर।
नेपाल में बाढ़ के कारण रसुवागढ़ी-केरुंग और तातोपानी सीमा नाके प्रभावित होने के बाद हिल्सा नाका मानसरोवर-कैलाश यात्रा पर गए भारतीय पर्यटकों के लिए वैकल्पिक मार्ग बन गया है। इससे उत्तरी सीमा पर स्थित हिल्सा का महत्व बढ़ गया है।
भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से केरुंग और तातोपानी नाके प्रभावित हुए। इसके बाद तिब्बत पहुंच चुके 150 से अधिक भारतीय पर्यटक हिल्सा के रास्ते नेपाल लौटे। पर्यटक हिल्सा से सिमकोट पहुंचे और फिर हवाई मार्ग से नेपालगंज होते हुए अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए।
पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि हाल की स्थिति ने हिल्सा को आपातकालीन रास्ते के साथ भविष्य में मानसरोवर-कैलाश यात्रा के नियमित प्रवेश और आवागमन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना दिखाई है।
पर्यटन एवं होटल व्यवसायी नोर्बु लामा ने हिल्सा से हुए हालिया पर्यटक आवागमन को दीर्घकालीन पर्यटन योजना से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण दो प्रमुख नाके प्रभावित होने से यात्रा बाधित हुई, लेकिन इसी स्थिति में हिल्सा वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ग के रूप में सामने आया।
उनके अनुसार हिल्सा नाके को व्यवस्थित करने पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है। इससे स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन, गाइड, ट्रेकिंग और रोजगार से जुड़े अवसरों में भी वृद्धि हो सकती है।
हुम्ला के प्रमुख जिला अधिकारी भोलानाथ गुरागाईं ने बताया कि भोटेकोशी में बाढ़ के बाद केरुंग की ओर यातायात प्रभावित हुआ। इसके चलते तिब्बत पहुंच चुके और केरुंग के रास्ते नेपाल नहीं लौट पाने वाले पर्यटकों ने हिल्सा का रास्ता अपनाया।
उन्होंने कहा कि हिल्सा में सड़क और अन्य जरूरी सुविधाएं बेहतर होने पर यह प्रभावी वैकल्पिक मार्ग बन सकता है। हिल्सा नाके को व्यवस्थित और सुगम बनाने से पर्यटकों की आवाजाही के साथ सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
रसुवागढ़ी और तातोपानी नाकों पर आई बाधा के बाद कुछ पर्यटकों ने यात्रा रद्द कर दी। कुछ पर्यटकों को ट्रैवल एजेंसियों ने वैकल्पिक मार्ग से मानसरोवर भेजा।
कैलाश मानसरोवर टूर ऑपरेटर्स नेपाल के महासचिव प्रदीप पंडित के अनुसार काठमांडू से ल्हासा की एकतरफा उड़ान का किराया करीब एक लाख नेपाली रुपये है, जिससे यह मार्ग महंगा पड़ता है।
उन्होंने बताया कि सामान्य स्थिति में काठमांडू से रसुवा होते हुए मानसरोवर पहुंचने में करीब 13 दिन लगते हैं। नेपालगंज-सिमकोट-हिल्सा मार्ग से यही यात्रा लगभग दो दिन कम समय में पूरी की जा सकती है।
















