न्यूयॉर्क, 23 सितंबर ।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान तुर्किये के राष्ट्राध्यक्ष रेचेप तैयप एर्दोगन ने अपने संबोधन में गाजा के मानवीय संकट पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने गाजा पट्टी को मौजूदा दौर का सबसे क्रूर और लज्जाजनक नजरबंद शिविर करार देते हुए वैश्विक मंच से इस गंभीर त्रासदी पर त्वरित और मानवीय कदम उठाने का पुरजोर आह्वान किया।
अपने संबोधन की शुरुआत में एर्दोगन ने फिलिस्तीनी नेता महमूद अब्बास की न्यूयॉर्क यात्रा रोके जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इस घटना को फिलिस्तीनी अवाम के साथ खुला अन्याय बताया और दोहराया कि तुर्किये हमेशा एक आजाद और संप्रभु फिलिस्तीनी देश के हक की आवाज उठाता रहेगा।
तुर्की के नेता ने गाजा में हो रही भारी तबाही और मासूमों पर पड़ रहे भयानक असर का जिक्र किया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि गाजा आज दुनिया का वह इलाका बन चुका है जहां बच्चों की मौत और उनके अंगों के कटने की दर सबसे अधिक है।
भाषण के दौरान उन्होंने पिछले वर्ष अमेरिकी प्रयासों से इजराइल और हमास के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते की विफलता का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक यह शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाने में नाकामी हाथ लगी, जिसका परिणाम यह हुआ कि गाजा में फिलिस्तीनियों की जान जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
एर्दोगन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गाजा की मौजूदा दुर्दशा केवल राजनीतिक मतभेद का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता और इंसानियत के जमीर का परीक्षण है। उन्होंने वैश्विक नेताओं से इस दुखद परिस्थिति पर आंखें मूंदने से बचने की अपील करते हुए कहा कि इंसानी दर्द और न्याय के प्रति सचेत रहने वाला कोई भी शख्स इस दर्दनाक हकीकत को अनदेखा नहीं कर सकता है।
















