काठमांडू, 23 सितंबर।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के आगामी भारत दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी तेजी के साथ आगे बढ़ रही हैं, जिसके तहत नवंबर महीने के अंतिम सप्ताह में इस बहुप्रतीक्षित यात्रा के आयोजन को लेकर दोनों मुल्कों के बीच आपसी समन्वय अंतिम चरण में है।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, आगामी 23 से 25 नवंबर के अंतराल में तय यह प्रस्तावित दौरा प्रधानमंत्री शाह के कार्यकाल की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी।
यद्यपि वे वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इक्यासीवें सत्र में शिरकत करने के सिलसिले में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में मौजूद हैं, जिसे उनकी प्राथमिक विदेश यात्रा माना जा सकता है, किंतु कूटनीतिक हलकों में भारत के इस दौरे को उनकी पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय हुकूमत की तरफ से इसी वर्ष जुलाई माह में प्रधानमंत्री शाह को नई दिल्ली आने का औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था।
इस आगामी उच्चस्तरीय यात्रा की रूपरेखा तैयार करने के सिलसिले में नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने हाल ही में भारत का दौरा किया था, जहां उन्होंने भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ ऊर्जा, आर्थिकी और संपर्क माध्यमों के विस्तार पर गहन चर्चा की थी।
प्रधानमंत्री शाह के इस संभावित दौरे का एजेंडा महज राजनीतिक शिष्टाचार तक सीमित न रहकर कूटनीतिक, आर्थिक और बुनियादी विकास के कई बड़े आयामों पर केंद्रित रहने वाला है।
दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्सौल से काठमांडू तक बिछने वाले ब्रॉडगेज रेलवे प्रोजेक्ट को लेकर किसी बड़े समझौते पर मुहर लगने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
इसी वर्ष जून के महीने में काठमांडू में हुई द्विपक्षीय रेलवे समितियों की बैठक में इस रेल लिंक की फाइनल लोकेशन सर्वे रिपोर्ट पर विस्तार से मंथन हुआ था, और साथ ही ऐतिहासिक जनकपुर से अयोध्या के बीच यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने से जुड़ी मानक संचालक प्रक्रिया यानी एसओपी पर भी विचार हुआ था।
ऐसे में पूरी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री शाह की इस यात्रा के दौरान रक्सौल-काठमांडू रेल परियोजना के क्रियान्वयन या आगामी प्रक्रिया को लेकर कोई महत्वपूर्ण घोषणा की जा सकती है।
इसके साथ ही नेपाल के पावन धार्मिक नगर जनकपुर और भारत के प्रतिष्ठित तीर्थ स्थल अयोध्या के बीच रेल संपर्क बहाल करने की योजना को भी इस यात्रा में विशेष प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
जून माह में दोनों पक्षों ने इस रेल मार्ग पर यात्री सेवाओं के संचालन को लेकर आवश्यक प्रक्रियाओं पर सहमति जताई थी, और संभव है कि प्रधानमंत्री शाह तथा भारतीय शीर्ष नेतृत्व इस महत्वाकांक्षी रेल सेवा को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाने का ऐलान करें।
इसके अतिरिक्त, ऊर्जा क्षेत्र के मोर्चे पर साढ़े सात सौ मेगावाट क्षमता वाली 'पश्चिम सेती जलविद्युत परियोजना' को लेकर भी किसी बड़े समझौते के होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
भारत की प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम कंपनी एनएचपीसी को पश्चिम सेती और साढ़े चार सौ मेगावाट वाली सेती नदी-6 परियोजना के विकास की जिम्मेदारी से जोड़ा गया है, जिनकी कुल संयुक्त क्षमता बारह सौ मेगावाट है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के आंकड़ों के मुताबिक इन परियोजनाओं के तकनीकी अध्ययन का कार्य प्रगति पर है, और नेपाल निवेश बोर्ड इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है।
व्यापारिक सुगमता और सीमाई कनेक्टिविटी को नए पंख देने के वास्ते सुदूर पश्चिमी नेपाल के दोधारा-चांदनी इलाके में बनने वाले इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का शिलान्यास भी इस यात्रा के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो सकता है।
यह परियोजना नेपाल के सुदूर पश्चिमी अंचल से भारत के साथ व्यापारिक आवाजाही को बेहद आसान बनाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दोनों देशों की सरहदों पर आपसी संपर्क को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से महाकाली नदी पर निर्मित मोटरेबल पुल का उद्घाटन भी इस प्रस्तावित कार्यक्रम की सूची का एक अहम हिस्सा हो सकता है।
इस पुल के शुरू हो जाने से नेपाल के सुदूर पश्चिमी हिस्सों और भारत के उत्तराखंड राज्य से लगी सीमाओं के बीच नागरिकों का आना-जाना तथा व्यापारिक गतिविधियां सुगम हो जाएंगी।
भारत के तकनीकी व वित्तीय सहयोग से बनकर तैयार हुई 'नेपाल पुलिस एकेडमी' के भव्य उद्घाटन को भी प्रधानमंत्री शाह के इस दौरे के दौरान अमलीजामा पहनाए जाने की पुरजोर तैयारी चल रही है।
यह उपक्रम दोनों मुल्कों के बीच सुरक्षा व्यवस्था, आपसी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में चले आ रहे पुराने व मजबूत सहयोग का एक जीवंत प्रतीक है।
इसके अलावा, भारत सरकार की मदद से भैरहवा क्षेत्र में स्थापित आधुनिक इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के संचालन का शुभारंभ भी इस यात्रा के दौरान संभावित कार्यक्रमों की सूची में रखा जा सकता है।
भैरहवा नेपाल के सबसे अहम व्यापारिक प्रवेश द्वारों में शुमार है जिसकी सीधी सीमा उत्तर प्रदेश से मिलती है, और इस चेक पोस्ट के खुलने से सीमावर्ती व्यापार तथा परिवहन प्रबंधन में अभूतपूर्व सुधार आएगा।
यह दौरा ऐसे नाजुक वक्त में आयोजित हो रहा है जब नेपाल हाल ही में आई भीषण भोटेकोशी बाढ़ और उसके कारण हुए व्यापक विनाश के गहरे जख्मों से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है।
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं, सड़कों, पुलों और अनगिनत रिहायशी मकानों को भारी क्षति पहुंचाई है, जिसके चलते देश के पुनर्निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय मदद की दरकार है।
चूंकि प्रधानमंत्री शाह के न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान भी नेपाल की आर्थिक बहाली और पुनर्निर्माण के लिए वैश्विक सहयोग जुटाना मुख्य एजेंडा रहा है, इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के उत्थान के लिए किसी विशेष राहत पैकेज का ऐलान किया जा सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि पैकेज के स्वरूप और राशि के तय होने के बाद ही सामने आएगी।
जन-जन के बीच आपसी मेलजोल और पर्यटन को बढ़ावा देने के सिलसिले में दोनों देशों के बीच नई विमान सेवाओं के विस्तार को लेकर भी उच्चस्तरीय बातचीत तय मानी जा रही है।
वर्तमान में भारत और नेपाल के बीच वर्ष 2010 में हुए हवाई सेवा समझौते के प्रावधानों के तहत उड़ानों का संचालन होता है, जिसके अंतर्गत दोनों दिशाओं में प्रति सप्ताह तीस हजार सीटों का कोटा निर्धारित है।
इस प्रस्तावित दौरे के दौरान नेपाल को भारत के पटना और देहरादून जैसे प्रमुख शहरों से सीधी विमान सेवा के जरिए जोड़ने को लेकर किसी नए समझौते पर सहमति बन सकती है, जिससे विशेषकर धार्मिक पर्यटन, उच्च शिक्षा, चिकित्सा और व्यापारिक गतिविधियों को जबरदस्त गति मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री शाह की यह बहुप्रतीक्षित भारत यात्रा सड़क, रेल, हवाई मार्गों, ऊर्जा गलियारों और सीमावर्ती ढांचागत विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक स्वर्णिम अवसर साबित हो सकती है।
ज्ञात हो कि भारत और नेपाल पहले से ही ऊर्जा व्यापार तथा ट्रांसमिशन लाइनों के विस्तार के क्षेत्र में आपसी सहयोग को लगातार नई धार दे रहे हैं, और इसी वर्ष जुलाई में हुई संयुक्त समितियों की बैठकों में हरित ऊर्जा, विद्युत उत्पादन तथा नए ग्रिड समन्वय को लेकर ठोस सहमति बनी थी, जिसके तहत नेपाल ने भारतीय बाजार के रास्ते क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
















