गुना, 07 अक्टूबर।
गुना जिले से आई राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 की रिपोर्ट चौंकाने वाली नहीं, बल्कि डराने वाली है। कानून है, पुलिस है, महिला एवं बाल विकास विभाग है और सरकार के तमाम प्रयास हैं, लेकिन बाल विवाह की परंपरा थमने का नाम नहीं ले रही है। रिपोर्ट कहती है कि 20 से 24 वर्ष की हर चौथी युवती का विवाह 18 साल की कानूनी उम्र से पहले हो चुका है। यह अनुपात 25.9 प्रतिशत है। पांच साल पहले यह 28.1 प्रतिशत था। यानी कमी तो आई, लेकिन राज्य के 20 प्रतिशत औसत से गुना अभी भी काफी ऊपर है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली तस्वीर पुरुषों के आंकड़ों में सामने आई है। 25 से 29 वर्ष की उम्र के 39 प्रतिशत पुरुषों की शादी 21 साल की कानूनी उम्र पूरी होने से पहले हुई है। पहले के सर्वे में यह अनुपात 21.8 प्रतिशत था। यानी पांच साल में 17.2 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। राज्य का औसत 25 प्रतिशत है।
शादी जल्दी तो मातृत्व भी जल्दी और फिर कुपोषण की मार। जिले में 15 से 19 वर्ष की 8.5 प्रतिशत किशोरियां सर्वे के समय या तो मां बन चुकी थीं या गर्भवती थीं। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 5.5 प्रतिशत था। यानी पांच साल में तीन प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। मध्य प्रदेश का औसत 5.6 प्रतिशत है। कम उम्र में मां बनने के कारण महिलाओं को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शरीर पूरी तरह विकसित भी नहीं हुआ होता और उस पर मातृत्व का बोझ डाल दिया जाता है। इससे महिला का हीमोग्लोबिन कम होता है, हड्डियां कमजोर होती हैं और बच्चा भी कम वजन का पैदा होता है। यही बच्चा आगे चलकर कुपोषित होता है और यही चक्र पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है।
सवाल है कि जब कानून है तो विवाह हो कैसे रहे हैं? उत्तर है, परंपरा और गरीबी। पुलिस को खबर लगती है तो वह मौके पर पहुंचती भी है, लेकिन लोग रातोंरात शादी करा देते हैं या दूसरे जिले में ले जाकर विवाह कर देते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को पता चलने पर भी कई बार सामाजिक दबाव में वह चुप रह जाती है। लोग सोचते हैं कि लड़की बड़ी हो रही है, जल्दी शादी कर दो तो जिम्मेदारी खत्म हो जाएगी। लड़के के मामले में सोचते हैं कि जल्दी शादी कर देंगे तो मजदूरी में हाथ बंटाएगा और घर संभालेगा। शिक्षा की कमी इस सोच को और मजबूत करती है। जिले में 15 से 49 वर्ष की केवल 18.9 प्रतिशत महिलाओं ने दस या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा पूरी की है, जबकि प्रदेश में इसका औसत 33.7 प्रतिशत है। जब शिक्षा नहीं होगी तो जागरूकता कहां से आएगी?
बाल विवाह की चर्चा में लड़कियों पर फोकस रहता है, लेकिन गुना में पुरुषों का आंकड़ा भी बड़ा सवाल है। 25 से 29 वर्ष के 39 प्रतिशत पुरुषों की शादी 21 साल से पहले हुई है। कम उम्र का लड़का न परिवार संभालने लायक होता है, न रोजगार के लायक। फिर वह भी मजदूरी करता है और गरीबी में पूरा परिवार फंस जाता है। केवल कानून का डंडा काफी नहीं है। शिक्षा मजबूत करनी होगी, गांव-गांव में बेटियों की शिक्षा पर जोर देना होगा और लोगों को कम उम्र में विवाह के दुष्परिणाम समझाने होंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग को किशोरियों की काउंसलिंग और पुलिस प्रशासन को विशेष निगरानी करनी होगी। गुना की रिपोर्ट पूरे मध्य प्रदेश के लिए चेतावनी है। बेटी को बचपन में ही दुल्हन बनाने की परंपरा रोकनी होगी, तभी हर बच्ची को अपना बचपन जीने का अवसर मिलेगा।













