नई दिल्ली, 11 अप्रैल।
केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह की अध्यक्षता में नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में आयोजित सीफूड निर्यातक सम्मेलन 2026 में वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में निर्यातकों से मौजूदा चुनौतियों जैसे बाजार पहुंच, मूल्य दबाव और अनुपालन आवश्यकताओं पर फीडबैक लिया गया तथा मूल्य संवर्धन, बाजार विविधीकरण और समुद्री क्षेत्रों से निर्यात विस्तार पर विचार-विमर्श किया गया।
मंत्री ने निर्यातकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें गैर-अमेरिकी बाजारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि निर्यात वृद्धि के साथ उत्पाद और बाजार विविधीकरण आवश्यक है तथा एंटीबायोटिक प्रतिबंधों और ट्रेसबिलिटी प्रणाली जैसे नियमों का सख्त पालन जरूरी है। उन्होंने ईईजेड नियमों के तहत एक्सेस पास प्रणाली के क्रियान्वयन और सहकारी समितियों को प्राथमिकता देने की बात भी कही।
उन्होंने अंडमान-निकोबार, ईईजेड और गहरे समुद्र से ट्यूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं पर जोर देते हुए बेहतर हैंडलिंग, कोल्ड-चेन, पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन और वैकल्पिक बाजारों की खोज को आवश्यक बताया ताकि पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम हो सके।

मंत्री ने निर्यातकों से एक लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य की दिशा में काम करने की अपील करते हुए कहा कि ईआईसी, एनसीडीसी, नाबार्ड और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय जैसी संस्थाएं पूरा सहयोग देंगी। उन्होंने अंडमान-निकोबार में हुए निवेशक सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जिससे सी-केज कल्चर, मोती पालन और डीप-सी फिशिंग जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिली है।
राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि बजट 2026 के बाद मत्स्य क्षेत्र को उच्च मूल्य और उच्च मांग वाले क्षेत्र के रूप में स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं तथा निर्यात वृद्धि को बनाए रखने के लिए अनुपालन, प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स और वैल्यू चेन विकास पर ध्यान जरूरी है।
मत्स्य विभाग के सचिव ने बताया कि एमपीईडीए, ईआईसी और वाणिज्य विभाग के साथ मिलकर बाजार विविधीकरण की रणनीति तैयार की गई है। लगभग चालीस देशों के राजदूतों से संवाद में सकारात्मक परिणाम मिले हैं और रेडी-टू-ईट तथा रेडी-टू-कुक उत्पादों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारतीय मिशनों के साथ निर्यातकों के सीधे संपर्क की व्यवस्था की जाएगी तथा एमपीईडीए को क्षमता निर्माण बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रतिस्पर्धा और अनुपालन क्षमता मजबूत हो सके।
बैठक में विभिन्न संस्थानों, निर्यात संघों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए मत्स्य निर्यात को बढ़ावा देने में आ रही बाधाओं जैसे टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाएं, उच्च अनुपालन लागत, कोल्ड-चेन की कमी और ट्रेसबिलिटी प्रणाली की जरूरत पर विस्तार से चर्चा की।








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